26/11 पर आधारित फिल्मों का क्या हुआ?

घोषणाएँ पानी का बुलबुला साबित हुईं

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बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशकों को शिकायत रहती है कि अच्छी कहानियों का अभाव है। इसलिए सच्ची घटनाओं पर उनकी निगाहें लगीं रहती हैं ताकि वे फिल्म बना सकें। 26/11 को मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद इस घटना को पर्दे पर दिखाने की मानो होड़ शुरू हो गई थी और कई निर्माताओं ने अपनी फिल्मों के नाम रजिस्टर्ड करवा लिए। ऐसा लगा कि दो-तीन माह में ये निर्माता अपनी फिल्म बनाकर प्रदर्शित कर देंगे। लेकिन अब तक कोई फिल्म इस घटना पर बनकर तैयार नहीं हुई और इक्का-दुक्का फिल्मों की शूटिंग चल रही है।

दरअसल इस घटना पर जिन निर्माता-निर्देशकों ने फिल्म बनाने की पहल की थी, वे दोयम दर्जे के थे। वे मौके का फायदा उठाना चाहते थे। लेकिन जब उन्हें लगा कि वे इस घटना के साथ न्याय नहीं कर पाएँगे तो उनकी फिल्में बंद हो गई।

साथ ही आतंकी हमले के बाद ताज होटल के दौरे पर मुख्यमंत्री के साथ रामगोपाल वर्मा भी गए थे। मीडिया और लोगों ने रामू पर आरोप लगाए थे कि वे अपनी फिल्म के लिए मसाला इकठ्ठा करने के लिए वहाँ गए थे। रामू को खूब खरी-खोटी सुनाई गई और लोग भड़क गए कि मुंबई कठिन दौर से गुजर रही है और रामू को फिल्म बनाने की सूझ रही है। रामू की आलोचना से उन फिल्ममेकर्स के कदम ठहर गए, जो अपने फायदे के लिए इस घटना पर फिल्म बना रहे थे। उन्हें लगा कि लोग नहीं चाहते इस घटना पर फिल्म बनाई जाए।

सफायर ओरिजन ने टेलीफिल्म ‘उन हजारों के नाम’ के जरिये इस दिशा में प्रयास किया है। विनोद खन्ना, सीमा बिस्वास और सादिया सिद्दकी अभिनीत यह फिल्म स्टार प्लस पर 26 नवंबर की रात दिखाई जाएगी।

जिस तरह से अमेरिका पर हुए हमले को लेकर फिल्में बनाई जा रही हैं, उसी तरह इस घटना को भी फिल्मकार अपनी नजर से पर्दे पर पेश कर सकते हैं। जरूरत है गंभीर फिल्मकार की, जो इसके साथ न्याय कर पाएँ। अपना मत दे सकें। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि जितनी फिल्में 26/11 पर घोषित हुई थीं, वे पानी का बुलबुला साबित हुईं और घोषणा से आगे नहीं बढ़ पाईं।

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