दो खबरों को एकसाथ रखने पर एक तीसरी खबर का जन्म होता है। एक खबर यह है कि सोनिया गाँधी अमेरिका गई हैं और उनकी अनुपस्थिति में देश में जिन कांग्रेसियों को काम सौंपा गया है, उसमें राहुल गाँधी भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि राहुल गाँधी को बागडौर सौंपने की यह तैयारी है।
दूसरी खबर यह है कि अमेठी में अण्णा हजारे के जनलोकपाल बिल का समर्थन किया है। जाहिर है अमेठी राहुल गाँधी का संसदीय क्षेत्र है और अण्णा को समर्थन मिलना एक संकेत हो सकता है कि कांग्रेस के लिए यहाँ मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। लोकपाल बिल को लेकर और अण्णा के अनशन को रोकने की कोशिशें निश्चित ही जनविरोधी और इस तरह से लोकतंत्र विरोधी मामला है। तो क्या यह माना जा सकता है कि कांग्रेस के इस रवैये से उसे राजनीतिक नुकसान होने की पूरी आशंका है।