- गायत्री शर्मा ये युवा हैं, ऊर्जा से भरे हुए। ये रचनात्मक हैं, अपनी आँखों में कुछ सपना लिए हुए। ये आसमाँ पर अपना नाम लिख देने की इच्छा से प्रेरित हैं। ये उमंग पर सवार, उत्साह से भरे हैं। इनकी आँखों में बेहतर से बेहतर काम करने का सपना करवटें ले रहा है और यही कारण है कि ये अपनी रचनात्मकता को नए आयाम दे रहे हैं। ये अपनी क्रिएटिव आई के जरिए थिएटर तो कभी फिल्म मेकिंग के जरिए अपनी पहचान बना रहे हैं। इंदौर के प्रतिभाशाली रंगकर्मी और गीतकार स्वानंद किरकिरे के नाटक के लिए लिखे गीत की पंक्तियों के सहारे कहें तो- आओ साथी सपना देखें, आओ साथी कुछ अपना देखें।
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कला हमें संस्कृति, सामाजिक सरोकारों व संस्कारों से पोषित करती हैं। यदि साहित्य और कला समाज से अलग हो जाएँ या अपने लक्ष्य से भटक जाएँ तो हमारी सामाजिक व्यवस्था जल्द ही बिखरकर छिन्न-भिन्न हो जाएगी। कला के एक सशक्त अतीत के बाद अब उसके सुनहरे भविष्य की सभी संभावनाएँ केवल युवाओं पर ही टिकी हैं। इसमें कोई दो मत नहीं कि आज का युवा जागरूक, प्रतिभावान और असीम ऊर्जा से लबरेज है।
उसमें समाज की विचारधारा को बदलने की ताकत है। यही वजह है कि समाज को नई दिशा दिखाने के लिए युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल और एमबीए की लीक से अलग हटकर अब अभिनय, लेखन और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं व नए-नए विषयों तथा मुद्दों पर फिल्मों व नाटकों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैला रहे हैं। आज हम आपका परिचय करा रहे हैं शहर के उन युवाओं से, जो इंदौर में रहकर ही अभिनय और फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं।
नुक्कड़ नाटक से जागरूकता : फिल्म और रंगमंच से जुड़े शहर के युवाओं में एक जाना-पहचाना नाम है राघवेंद्र तिवारी का, जिनका पेशा, पहचान और जिंदगी सब कुछ अभिनय ही है। उनके इस कार्य में उनकी जीवनसंगिनी श्रीमती सिंदूर तिवारी भी सहयोगी कलाकार के रूप में उनका साथ निभा रही हैं। ई टीवी, डीडी-1 और संस्कार चैनल के ले चुटकी, हम हैं हम रहेंगे, सलाम यूपी, म्यूजिक मस्ती जैसे कई प्रोग्रामों और वैभव लक्ष्मी, इच्छाधारी, द विलेन, भुनसारा, ईशावस्यम जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेर चुके राघवेंद्र तिवारी शहर में प्रयास कला संगम नाम से एक संस्था संचालित कर रहे हैं। इसमें 12 से अधिक युवा उनसे अभिनय की बारीकियाँ सीखने के साथ ही उनके साथ नाटकों में काम कर अपनी आजीविका भी जुटा रहे हैं। प्रयास संस्था शहर और शहर के आसपास स्थित गाँवों में जाकर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से भ्रूण हत्या, एड्स, नशाखोरी आदि के खिलाफ लोगों में जागरूकता फैलाती है।
फिल्म निर्माण भी है चुनौतीपूर्ण : आमतौर पर लड़कियाँ ग्लैमर से जुड़े क्षेत्रों में अपना करियर बनाना पसंद करती हैं या फिर उनकी रुचि लड़कियों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों जैसे बैंकिंग, टीचिंग, प्रशासनिक सेवाएँ आदि में होती है, लेकिन भीड़ से हटकर अपनी पहचान बनाने के लिए जेसलिन जॉन ने चुना एक ऐसा करियर, जिसमें मेहनत और क्रिएटिविटी दोनों ही अपेक्षित होती है। कलर्स और ग्राफिक्स की शौकीन जेसलिन लगभग 9 वर्षों से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय है। वर्तमान में वह सतप्रकाशन स्टूडियो में फादर जियो जॉर्ज के साथ बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर रही हैं। उनका मानना है कि इंदौर में भी असीम प्रतिभाएँ हैं और यहाँ उनके काम करने के लिए अवसर भी भरपूर हैं, लेकिन पलायनवादी सोच के चलते कई युवा मुंबई व दिल्ली जैसे महानगरों का रुख कर लेते हैं, जबकि इंदौर में भी युवाओं को बेहतर ट्रेनिंग व अच्छा काम सीखने का भरपूर मौका मिलता है।
अभिनय में असीम संभावनाएँ : भुनसारा, द विलेन और इच्छाधारी जैसी कई फिल्मों में अपने अभिनय के कमाल से वाहवाही पाने वाली अंजुबाला वर्तमान में प्रयास कला संगम के साथ कार्य कर रही हैं। इन फिल्मों में अंजुबाला के बेहतर अभिनय को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उन्हें भोपाल फिल्म समारोह में प्रदेश की बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। अंजु की मानें तो हमारे प्रदेश में भी यदि बड़े बजट की फिल्मों का निर्माण होगा तो यहाँ की प्रतिभाओं को अपने हूनर को दिखाने का नया मंच मिलेगा।
बनना चाहता हूँ गुरु की तरह : शहर की एक होटल में मंच पर प्रस्तुत किए जा रहे नाटक का आशीष मालवीय के दिलो-दिमाग पर इतना अधिक असर हुआ कि उसी समय से उन्होंने अभिनय को अपना पेशा बनाने की ठान ली। अपने गुरु राघवेंद्र तिवारी के अभिनय से प्रभावित आशीष भी आगे चलकर उन्हीं की तरह एक अच्छा कलाकार बनना चाहते हैं।
भेड़चाल चलना उचित नहीं : जहाँ पर कान छिदवाए जाते हैं, वहाँ मटन की आशा नहीं करना चाहिए। किसी विद्वान की कही इस बात को अपने जीवन का सूत्र वाक्य मानने वाले संदेश महाजन लगभग 5 सालों से डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के निर्माण के साथ-साथ फिल्मों में अभिनय भी कर रहे हैं। 10 से अधिक फिक्शन फिल्में बना चुके संदेश यह मानते हैं कि इंदौर में वो सब कुछ है, जिसे खोजने की तलाश में युवा कलाकार मुंबई या दिल्ली जाता है और महानगरों में दर-दर भटककर मेहनत मजदूरी करने को स्ट्रगल का नाम देता है। यदि आपको अपनी क्रिएटिविटी और अपना काम दिखाना है तो इंदौर आपके लिए बेहतर जगह है। यदि आप यहीं रहकर वो सब कुछ कर सकते हो तो फिर भेड़चाल चलकर शहर से भागना किसी दृष्टि से उचित नहीं है।