2जी घोटाले में आए नए घटनाक्रम में पूर्व संचार मंत्री ए. राजा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम को घेर लिया है।
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उन्होंने आरोप लगाए हैं कि 2 जी लाइसेंस हासिल करने वाली कंपनियों में विदेशी हिस्सेदारी पर मनमोहन सिंह और पी. चिदंबरम की सहमति थी। उनके आरोप में पी. चिदंबरम अपनी दलीलें दे रहे हैं। इधर इस पूरे मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से इस्तीफा देने की माँग की है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि ये दोनों इस्तीफा नहीं देंगे।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह एक तरह की मिली-जुली राजनीतिक रणनीति है कि किसी भी मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का इतना घटाटोल पैदा कर दिया जाए कि कुछ सूझे ना। यह राजनीतिक चालबाजियाँ भारतीय राजनीति का स्थायी भाव बन गई हैं। इसके पहले भी भ्रष्टाचार के मामलों पर राजनीतिक पार्टियों का यही व्यवहार रहा है। राजनीतिक पार्टियाँ भरसक यह कोशिश करती हैं कि यथास्थिति बनी रहे, क्योंकि यही उसके लिए हितकर लगता है।