लंदन के टोटेनहैम से उठी आग में वहाँ की युवा पीढ़ी झुलस रही है। एक युवक की मौत के बाद लंदन से शुरू हुए दंगे आसपास के इलाकों में फैल गए हैं, लेकिन जो खबरें आ रही हैं, वे चौंकाने से ज्यादा एक डर पैदा करती हैं। डर यह है कि किसी भी देश की आर्थिक-सामाजिक नीतियाँ किस तरह से एक लंबे समय बाद उसी देश के लिए कितनी घातक भी साबित हो सकती हैं और विशेषकर आर्थिक नीतियाँ देश पर खासा असर डालती हैं और उनका सीधा असर युवाओं के जीवन को प्रभावित करता है।
दंगों में जो वर्ग शामिल हुआ है वह उसी वर्ग का है, जो ब्रिटेन की गलत नीतियों का शिकार हुआ है, लेकिन गलत नीतियों का मामला सिर्फ ब्रिटेन में ही नहीं है। आज जिस तरह हिन्दुस्तान में भी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दबाव में जिस तरह आर्थिक नीतियाँ बनाई जा रही हैं, वे हो सकता है भविष्य में हमारी युवा पीढ़ी को भी उसी तरह से झुलसाएँगी, जिस तरह वे ब्रिटेन में झुलसा रही हैं। इसलिए टोटेनहैम से निकली आग की आँच दूर तक जाएगी।