देश में ऐसे कई उद्योग हैं जिन्होंने गत 20 वर्षों में ही काफी प्रगति की है। इसके अलावा कई अन्य ऐसे उद्योग भी हैं जो की काफी नए हैं पर प्रगति कर रहे हैं।
मेडिकल एवं सर्जिकल उपकरण
इस वर्ग में मेडिकल, सर्जिकल, डेंटल सभी प्रकार के औजार और इलेक्ट्रो-मेडिकल उपकरण आते हैं। एक्स-रे उपकरण, फिजियो-थेरेपी औजार और उपस्कर आर्थोपीडिक उपकरण इस वर्ग में आते हैं। उदारीकरण के साथ पिछले 15 वर्षों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और मेडिकल-सर्जिकल उपकरणों की माँग बहुत बढ़ी है। इसके कारण भारत में यह उद्योग खूब बढ़ा है।प्रोसेस कंट्रोल इंस्ट्रूमेंट उद्योग प्रोसेस कंट्रोल इंस्ट्रूमेंट उद्योग को टेक्नोलॉजीकल विकास का उत्प्रेरक माना गया है। इन उपकरणों को आधुनिक औद्योगिक गतिविधियों का अभिन्न भाग कहा गया है। इस उद्योग में अनेक प्रकार के उपकरण आते हैं, जिनकी जरूरत रासायनिक और जीववैज्ञानिक गतिविधियों को मापने में पड़ती है। इन्हें दबाव, तापमान, नमी, स्तर, प्रवाह आदि पर नजर रखने में इस्तेमाल किया जाता है। इनका प्रमुख उपयोग उर्वरक, इस्पात, बिजलीघर, तेलशोधक संयंत्र, पेट्रोकेमिकल, सीमेंट तथा अन्य प्रसंस्करण उद्योग प्रमुख हैं।सीमलेस स्टील पाइप और ट्यूब ये कई आकार-प्रकार के बनते हैं, जिनमें पतले, छोटे, बारीक और अन्य प्रकार के स्टील पाइप शामिल हैं। इनका निर्माण कमर्शियल फर्नेस में किया जाता है। सीमलेस पाइप कई प्रकार के आते हैं जैसे- हाट रोल्ड, कोल्ड ड्रान, रोटोरोल्ड आदि। सीमलेस पाइपों की 60 प्रश खपत तेल क्षेत्र में होती है।इलेक्ट्रिक रेसिस्टैंट वेल्डेड स्टील पाइप और ट्यूब इन पाइपों का इस्तेमाल बाड़ लगाने, पाइपों में अस्तर डालने, पानी और गैस पहुँचाने, निर्माण और ढाँचों आदि में किया जाता है। इन पाइपों के उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। इसका कारण है गैस उद्योग, मूल संरचना और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बढ़ती माँग। इंडस्ट्रियल फास्टनर्स फास्टनर्स वह हार्डवेयर उपकरण है, जो दो या अधिक वस्तुओं को मशीनी रूप से जोड़ने के काम आते हैं। इस उद्योग की प्राप्ति उन उद्योगों के भविष्य पर निर्भर करती है, जिनमें इनका इस्तेमाल किया जाता है। जैसे- वस्त्र, ऑटोमोबाइल और सामान्य इंजीनियरिंग। भारत में फास्टनर उद्योग को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है- उच्च तननशील और मृदु इस्पात फास्टनर्स।इस्पात फोर्जिंग निर्माण प्रक्रिया में फार्जिंग (गढ़त) की महत्वपूर्ण भूमिका है। फोर्जिंग मध्यवर्ती उत्पाद हैं और ड्यूरेबल वस्तुओं में मूल उपकरण के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं। ये आकार में एक औंस से कम के अथवा 150 टन भारी बड़े आकार के हो सकते हैं। इनका निर्माण विभिन्न तरीकों से किया जाता है। इनकी अधिकांश माँग ऑटो-मोबाइल उद्योग में है और लगभग 65 प्रश फोर्जिंग का इस्तेमाल यही उद्योग करता है। इसका इस्तेमाल रेलवे, डिफेंस, तेल खोज आदि में भी होता है।साइकल उद्योग भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा साइकल उत्पादक देश है। आज दुनिया में भारत की साइकल और कलपुर्जों की उत्पादन क्षमता की अच्छी ख्याति है। यह उद्योग निर्यात बढ़ाने की भी कोशिशें कर रहा है, क्योंकि इसकी बहुत गुंजाइश है।खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अनाज उत्पादक है, लेकिन अपेक्षाकृत रूप से हमारा अनाज प्रसंस्करण उद्योग छोटा है, परंतु परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं और अनाज प्रसंस्करण मशीनों का घरेलू बाजार तेजी से बढ़ा है। फल और सब्जियों की प्रोसेसिंग सबसे ज्यादा संभावना वाले क्षेत्र हैं। मांस, डेयरी उत्पाद, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, सॉफ्ट ड्रिंक्स, अनाज के डिब्बाबंद पदार्थ भी लोकप्रिय हैं।इन उद्योगों में भी काफी प्रगति हो रही है देश में ऐसे उद्योग भी हैं, जिनमें काफी तेजी से प्रगति हो रही है, जिनमें इंडस्ट्रियल गीयर, सीमेंट उद्योग, चमड़ा उद्योग, कागज तथा अखबारी कागज उद्योग,साबुन और डिटरजेंट उद्योग।