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कॉफी विद करंट

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हमें फॉलो करें युवा
- गायत्री शर्म
युवा बिंदास है। बोल्ड है। हर सब्जेक्ट पर उसकी अपनी राय है। वह डूबकर सोचता है। खुलकर बोलता है। राजनीति हो या फिल्म, सेक्स हो या धोखा वह बिना झिझक के बोल डालता है। इस बार युवा ने कुछ युवाओं से कॉफी पीते हुए बात की कि वे समाज से और अपने से गहरे जुड़े कुछ करंट टॉपिक्स पर क्या सोचते हैं, तो प्रस्तुत है कॉफी विद करंट
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दिल की बातों को खुलकर कहना युवाओं की खासियत है। वे अपनी बातों में खुलते हैं, खिलखिलाते हैं। कभी गुनगुनाते हैं और गुदगुदाते हैं और फिर इसके साथ कॉफी हो तो इस सबका मजा कुछ और बढ़ जाता है। जाहिर है इसके लिए कॉफी एक अच्छा बहाना है। गरम-गरम कॉफी हो, धीमे-धीमे उसकी चुस्कियाँ ली जा रही हों और बातें हों तो उस गरमा-गरम माहौल की बात ही कुछ और होती है। वहाँ बुराइयों का दौर भी चलता है, तारीफों के पुल भी बाँधे जाते हैं और कभी-कभी इस बीच तकरार भी हो जाती है।

इसलिए जब भी मूड किया तब निकल लेते हैं ये युवा अपने दोस्तों के साथ कॉफी की चुस्कियाँ लेने के लिए, लेकिन कॉफी टेबल पर अपने दोस्तों के साथ ये युवा घंटों बैठकर देश और दुनिया की चर्चा भी करते हैं। पर्सनल बातों पर डिस्कशन भी होता है और कुछ करंट टॉपिक्स पर डिबेट भी होती है। इसलिए इस बार युवाओं से गरम-गरम कॉफी पीते हुए कुछ मुद्दों पर बातें हुईं। कॉफी की चुस्कियों के साथ युवा साथी नुपूर नवलखे, दीप कटारिया, विक्रांतसिंह ठाकुर और नुपूर भोरास्कर मौजूद थे। इनसे बातें हुईं, इन्होंने अपनी बेबाक राय दी। आइए जानते हैं कि ये युवा क्या फरमा रहे हैं :

सेक्स : बोले तो कोई हर्ज नही
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सेक्स संबंधों को लेकर युवाओं में जहाँ खुलापन है, वहीं एक झिझक भी। कुछ युवाओं ने जहाँ खुलकर सेक्स संबंधों की हिमाकत की, वहीं कुछेक का कहना था कि इनसे दूरी ही भली है। सेक्स संबंधों के समर्थक युवाओं का तर्क है कि उम्र के अनुसार हमारे शरीर में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। इसके मद्देनजर सेक्स संबंध कहीं न कहीं हमारी चाह बनकर हमारे शरीर की भी माँग बन जाते हैं। इन दिनों फिल्मों भी अलग-अलग तरीकों से सेक्स को ही परोसा जा रहा है। ऐसा मानने वाले युवाओं के अनुसार यदि वो अपने प्रेम संबंधों को लेकर गंभीर हैं तो अपने पार्टनर की सहमति से सेक्स संबंध बनाने में कोई हर्ज नहीं है।

मूवी : दिल ले गई बॉडी भा ग
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रिलीज होने वाली आगामी फिल्मों पर चर्चा करना युवाओं की आदत भी है और उनकी रुचि का विषय भी। खेलों के बारे में चर्चा करने के मामले में भले ही युवा लड़के-लड़कियों के अलग-अलग ग्रुप बँट जाते हों, पर फिल्मों के बारे में लड़का हो या लड़की, चर्चा में हर कोई अपनी भागीदारी जरूर निभाता है। नई मूवी देखने जाने की प्लानिंग के साथ ही उस मूवी के हिट या फ्लॉप रहने के पूर्वानुमान कॉफी टेबल पर भी डिस्कस कर लिए जाते हैं। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म बॉडीगार्ड और मेरे ब्रदर की दुल्हन की ही बात करें तो अधिकांश युवाओं का झुकाव कैटरीना की फिल्म मेरे ब्रदर की दुह्लन की ओर ही देखने को मिला। हालाँकि सलमान को पसंद करने वाले उनके युवा प्रशंसकों को बॉडीगार्ड में सल्लू मियाँ की बॉडी बड़ी अच्छी लगी, पर करीना को देखकर उन्हें यह फिल्म ठीक-ठाक लगी। फिल्म कोई भी हो उसका पोस्टमार्टम तो उसी कॉफी टेबल पर होता है, जहाँ चार यार मिलकर बातों ही बातों में उस फिल्म का भविष्य तय करते हैं।

राजनीति : बदल डाल ये तस्वीर
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अधिकांश युवा छात्रसंघ चुनावों को युवा राजनीति का बेहतर मंच मानते हैं। युवाओं से चर्चा में सक्रिय राजनीति की ओर उनका झुकाव कुछ कम ही नजर आया। एक ओर जहाँ युवा राजनीति में बदलाव का समर्थन करते हैं, वहीं वे राजनीति में वंशवाद का भी विरोध करते हैं। उनके अनुसार वंशवाद या परिवारवाद कहीं न कहीं युवाओं को राजनीति में उनके भविष्य को लेकर भयभीत करता है। युवाओं की मानें तो राजनीति में कदम रखने के बुरे अनुभव, सिफारिश की राजनीति व इसमें देरी से मिलने वाली सफलता ही उन्हें राजनीति में आने से रोकती है। इस बात पर युवाओं की सहमति है कि यदि युवा राजनीति में कदम रखेंगे तो देश की राजनीति की तस्वीर ही बदल जाएगी। उनके अनुसार कुछ दिनों पहले जिस तरह से देश की युवा शक्ति ने सड़कों पर उतरकर अण्णा हजारे का समर्थन किया था। वह काबिले तारीफ था। उनके ही शब्दों में कल तक तो अण्णा हमारा नेता था, लेकिन क्या अब हम किसी बैसाखी के बगैर अकेले किसी आंदोलन की अगुवाई नहीं कर सकते हैं? हम कह सकते हैं। बस जरूरत है तो अपने आत्मविश्वास को प्रबल करने की।

धोखा : दिल से ही नहीं दिमाग से भी काम लें
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किसी प्यारे चेहरे को देखकर उनके दिल में घंटी बजने लगती है। मुलाकात होती है तो दिल धकड़ने लगते हैं और फिर यदि धोखा मिलता है तो एक तरफ कहीं आँसू उमड़ने लगते हैं तो कहीं खून खौल उठता है। प्यार, मुलाकात और धोखा आजकल रिश्तों के तीन क्रमबद्घ चरण-से बन चुके हैं। युवाओं के जीवन से जुड़ी ये बहुत ही संवेदनशील बातें हैं। युवाओं से जब हमने रिश्तों में धोखे पर बात की तो उनके अनुसार रिश्तों में धोखा उन्हीं युवाओं को मिलता है, जो बगैर सोचे-समझे नया रिश्ता बना लेते हैं। कई बार एक-दूसरे के जीवन में जरूरत से अधिक दखलंदाजी भी रिश्तों में कटुता लाती है। इसके विपरीत जिन युवाओं के बीच आपसी समझ और तालमेल अच्छा होता है, उनके रिश्ते टिकाऊ और प्रेमिल होते हैं। जाहिर है दिल से ही नहीं, दिमाग से काम लेने की जरूरत है।

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