सूचना और प्रसारण मंत्रालय रेडियो, टेलीविजन, फिल्म, प्रेस तथा प्रिंट प्रकाशन, विज्ञापन और संचार के पारंपरिक तरीकों जैसे नाटक, संगीत आदि के जरिए जनसंचार के साथ-साथ सूचना का प्रवाह करता है। मंत्रालय विभिन्न आयु समूह के लोगों को मनोरंजन उपलब्ध कराने के साथ ही राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य देखभाल, परिवार कल्याण, निरक्षरता उन्मूलन तथा बच्चों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और समाज के अन्य दुर्बल वर्गों की समस्याओं के प्रति जागरूकता भी उत्पन्न करता है। मंत्रालय के चार विंग सूचना विंग, प्रसारण विंग, फिल्म विंग तथा समन्वित वित्त विंग हैं। मंत्रालय की 24 मीडिया इकाइयाँ हैं।
प्रसार भारती प्रसार भारती देश में सार्वजनिक प्रसारण सेवा है और आकाशवाणी तथा दूरदर्शन इसके दो घटक हैं। लोगों को सूचना, शिक्षा तथा मनोरंजन प्रदान करने और रेडियो तथा टेलीविजन पर प्रसारण का संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए 23 नवंबर 1997 को प्रसार भारती का गठन किया गया। निगम का कार्य संचालन प्रसार भारती बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिसमें एक अध्यक्ष, एक कार्यकारी सदस्य, एक सदस्य सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का एक प्रतिनिधि तथा पदेन सदस्यों के रूप में आकाशवाणी महानिदेशक और दूरदर्शन महानिदेशक शामिल होते हैं। इसका अध्यक्ष अंशकालिक सदस्य होता है, जिसका कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
आकाशवाणी भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत 1920 के दशक में हुई। पहला कार्यक्रम 1923 में मुंबई के रेडियो क्लब द्वारा प्रसारित किया गया। इसके बाद 1927 में मुंबई और कोलकाता में निजी स्वामित्व वाले दो ट्रांसमीटरों से प्रसारण सेवा की स्थापना हुई। सन 1930 में सरकार ने इन ट्रांसमीटरों को अपने नियंत्रण में ले लिया और भारतीय प्रसारण सेवा के नाम से उन्हें परिचालित करना आरंभ कर दिया। 1936 में इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया गया और यह 1957 में आकाशवाणी के नाम से पुकारा जाने लगा।
समाचार सेवा प्रभाग समाचार सेवा प्रभाग 24 घंटे प्रसारण करता है और घरेलू तथा विदेशी सेवाओं में कुल मिलाकर 620 से अधिक समाचार बुलेटिन प्रसारित करता है। ये भारतीय और विदेशी भाषाओं में होते हैं। समाचार सेवा प्रभाग का प्रमुख महानिदेशक समाचार सेवा होता है। इसकी 45 क्षेत्रीय समाचार इकाइयाँ हैं। श्रोताओं की समाचारों के प्रति रुचि के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों से अलग-अलग बुलेटिन प्रसारित किए जाते हैं।
विदेश सेवा प्रभाग आकाशवाणी का विदेश सेवा प्रभाग 16 विदेशी भाषाओं और 11 भारतीय भाषाओं में प्रसारण करता है। इस सेवा की दैनिक कुल प्रसारण अवधि 72 घंटे है और ये प्रसारण 100 देशों में प्रसारित किए जाते हैं।
देश में 40 विविध भारती सह वाणिज्यिक प्रसारण सेवा केंद्र हैं, जिनमें 3 ऐसे केंद्र भी हैं, जो केवल वाणिज्यिक प्रसारण केंद्र के रूप में कार्य करते हैं।
आजादी के बाद से आकाशवाणी दुनिया के सबसे बड़े प्रसारण नेटवर्कों में से एक बन गया है। आजादी के समय कुल 6 आकाशवाणी केंद्र और 18 ट्रांसमीटर थे, जो देश के 2.5 प्रश क्षेत्र में 11 प्रश जनसंख्या तक पहुँच पाते थे। आज इसका नेटवर्क बढ़कर 232 आकाशवाणी केंद्रों और 374 ट्रांसमीटरों का हो गया, जो देश के 91.82 प्रतिशत भू-भाग में 99.16 प्रतिशत जनसंख्या की पहुँच में है।
आकाशवाणी आधुनिकीकरण व तकनीकी उन्नयन की ओर ध्यान दे रहा है। इसने कार्यक्रम निर्माण और प्रसारण दोनों में व्यापक डिजीटलाइजेशन कार्यक्रम शुरू किया है। कई रेडियो स्टेशनों के एनेलॉग उपकरणों के स्थान पर अत्याधुनिक डिजीटल उपकरण लगा दिए गए हैं। 76 आकाशवाणी केंद्रों में कम्प्यूटर हार्ड डिस्क आधारित रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और प्लेबैक प्रणाली पहले ही उपलब्ध करा दी गई है। 61 केंद्रों पर इन्हें उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस समय आकाशवाणी के 48 मुख्य केंद्रों में हार्ड डिस्क पर आधारित प्रणाली उपलब्ध कराने का काम चल रहा है।