संता : यार हम लोगों का रिश्ता क्या है?
बंता : वही जो बेसन और पकौड़े का होता है।
संता : वो कैसे?
बंता : वैरी सिम्पल। जब बेसन सनता है तो ही पकौड़े बनता है।
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सुमित : मेरे पापा इतने होशियार हैं कि वो जब भी माचिस लेते हैं तो माचिस की तीलियाँ डिब्बी खोलकर गिनते हैं।
अमित : ये तो कुछ भी नहीं। मेरे पापा तो इतने होशियार हैं कि वो जब भी माचिस लेते हैं तो सारी तीलियाँ जलाकर देखते हैं।
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प्यार हुआ इकरार हुआ
प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल
क्यूँ न डरे दिल, क्योंकि आजकल के प्यार से बढ़ता है
सिर्फ मोबाइल और रेस्टॉरेंट का बिल।
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संता को सपने में लड़की ने चप्पल से मारा।
अगले दो दिन तक संता अपने बैंक नहीं गया, क्योंकि वहाँ लिखा था। - हम आपके सपने को हकीकत में बदलते हैं।