- गायत्री शर्मा इशारों-इशारों में दिल लेने वाले, बता ये हुनर तूने सीखा कहाँ से... एक मोबाइल फोन के विज्ञापन में सुनाया जाने वाला यह गीत इस नए दौर में भी प्रेमियों को प्रेम की मधुरता का मीठा एहसास कराता है। यह सच है कि चोरी-चोरी, चुपके-चुपके कभी न कभी तो सभी को प्यार हो ही जाता है। फिर चाहे जमाने की लाख बाधाएँ आऍं। उन सभी को पार कर प्रेमियों के दिल का कबूतर तो कभी कॉलेज कैंपस में, कभी सिनेमाघर में या फिर रेस्तराँ में... प्रेम की गुटर गूँ करने ही लगता है।
दोस्तों, प्यार वही है जो उम्र, जात-पांत, अमीरी-गरीबी के हर बंधन
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से परे अपना इतिहास खुद बनाता है। अपने हमराज के रूप में हर प्रेमी एक ऐसा हमसफर तलाशता है, जिसके दिल के किसी कोने में बसकर दुनिया के हर गम को भूलाया जा सके। अजब प्रेम की गजब और रोचक कहानियों के लिए हमने बात की शहर के कुछ ऐसे प्रेमियों से, जिन्होंने एकदम फिल्मी स्टाइल में अपने प्रेम की नैया को किनारे लगाकर अपने प्रेमी को ही अपना हमसफर बनाया। कॉलेज कैंपस, कोचिंग और लिफ्ट देने के बहाने से शुरू हुए प्यार के ये इंट्रेस्टिंग किस्से इतने लाजवाब हैं कि इन्हें पढ़कर आप भी इन प्रेमियों के बारे में हमारी तरह यही कह उठेंगे कि मान गए उस्ताद।
किराए पर लिया था एसटीडी पीसीओ हर्षल और राधिका देशमुख का प्यार कॉलेज कैंपस से शुरू हुआ। बीकॉम फर्स्ट ईयर करते समय अपने से दो साल सीनियर खूबसूरत लड़की राधिका पिंगे को टीचर्स डे के कार्यक्रम का संचालन करते देख हर्षल उन्हें अपना दिल दे बैठे। उसके बाद तो यूथ फेस्टिवल और कॉलेज के अन्य कार्यक्रमों के बहाने एक साल तक इन दोनों की लगातार मुलाकातें होती रहीं, लेकिन जब राधिका की बीकॉम की पढ़ाई पूरी हो गई। उसके बाद दोनों को मुलाकातों के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ा और राधिका की एक झलक पाने के लिए हर्षल को उसकी कोचिंग के बार-बार चक्कर लगाने पड़े।
अपने प्रेमी से मिलने को बेकरार राधिका भी कोचिंग के बाद हर रोज एसटीडी पीसीओ पर जाकर हर्षल से बात कर उसे अपने दिल का हाल बताती थी। लगातार घाटे में चलने के कारण जब राधिका की कोचिंग के बेसमेंट में स्थित एसटीडी पीसीओ बंद होने वाला था।
तब अपनी प्रेमिका की आवाज सुनने की बेकरारी ने हर्षल को इतना मजबूर कर दिया कि हर्षल ने उस एसटीडी वाले को चार-पाँच माह के लिए किराए पर लेकर उसे हर माह का किराया देना शुरू कर दिया, ताकि वह पीसीओ बंद न हो और राधिका से उनकी हर रोज बात हो सके। कुछ इस तरह से इनके प्यार की गाड़ी लव के ट्रेक पर आगे बढ़ने लगी, लेकिन जब दोनों के घरवालों को इनकी प्रेम कहानी का पता लगा। तब लड़की को सही राह पर लाने के उसके रिश्ते के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए।
दोनों की मुलाकातों पर लगाम लगाने की कोशिश की गई, लेकिन इन दो प्रेमियों की जिद और प्यार के आगे परिवार की हर कोशिश नाकाम रही और अंततः हर्षल और राधिका के प्यार की जीत हुई और फिर परिवार की सहमति से शादी।
प्यार हो तो ऐसा फाइन आर्ट्स कॉलेज में बीएफए करते समय मनप्रीत कौर (परिवर्तित नाम) को प्यार हुआ अपने से एक साल सीनियर मोहित (परिवर्तित नाम) से। क्लास में अपने सीनियर से ड्राइंग सीखते-सीखते मनप्रीत के दिल के कैनवास पर मोहित के प्यार के चित्र उभरने लगे। जब उसे सीनियर्स के साथ शहर से बाहर घुमने का मौका मिला।
तब मौका मिलते ही मनप्रीत ने मोहित से अपने दिल की बात कह डाली। हालाँकि इस अप्रत्याशित इजहारे ईश्क से सहमे मोहित ने इस बारे में सोचने के लिए मनप्रीत से दो-चार दिन का समय माँगा।
प्यार को दीर्घायु बनाने के लिए जरूरी है
* विश्वास जीवनभर साथ निभाने का।
* हिम्मत जमाने को जवाब देने की।
* बिंदास अंदाज अपने प्यार के इजहार का।
* देखभाल उसकी जिससे आप प्यार करते हो।
आशा के अनुरूप दो-तीन दिन बाद मोहित की ओर से प्रेम का ग्रीन सिग्नल मिलते ही इन दोनों की कोरी कल्पनाएँ प्रेम के खुशनुमा रंगों से भर गई। उसके बाद ड्राइंग के आदान-प्रदान से दिल की बातें बयाँ की जाने लगीं। कहते हैं प्रेमियों की खुशियाँ जमाने की बुरी नजरों से बच नहीं सकतीं। एक बार जब सिनेमाघर से निकलते समय मनप्रीत के चाचा की नजरें इन प्रेमियों पर पड़ीं। तब मोहित की क्लास लेने के लिए मनप्रीत के चाचा ने रात 8.30 बजे उसे अपने घर बुलाया। डरा-सहमा मोहित दोस्तों के कहने पर समय से 10 मिनट पूर्व ही निर्धारित जगह पर पहुँच गया।
मोहित की सुरक्षा के लिए उसके दोस्तों ने उसे अपने दो-तीन मोबाइल दिए थे, ताकि एक कॉल पर मोहित के दोस्त उस तक पहुँच सकें। ठीक 8.30 बजे मोहित ने जब चाचाजी के घर के दरवाजे को खटखटाया तो एक-एक करके चाचा, चाची, दादी, दीदी सबकी मोटी-मोटी आँखों ने उसकी तरफ गुस्से भरी निगाहों से देखा।
परिवारजनों के बीच एक कुर्सी पर बैठाकर चाचा ने मोहित की क्लास लेना शुरू की। तुम मनप्रीत के साथ क्यों घुमते हो, कुछ कमाते-धमाते क्यों नहीं, आगे चलकर जीवन में क्या करने का इरादा है? इस तरह के कई सवालों से मोहित की अग्नि परीक्षा ली गई। कुछ देर बाद दोनों प्रेमियों को एकसाथ बैठाकर भी दोनों से सवाल-जवाब किए गए। जैसे-तैसे करके मोहित ने चाचा से पीछा छुड़ाया तो कुछ दिनों बाद ही मनप्रीत के पिता की ओर से भी मोहित की क्लास लेने का निमंत्रण आया।
हालाँकि अपने होने वाले ससुर को मनाना मोहित के लिए आसान नहीं था, पर प्यार को पाने की जिद और मनप्रीत के विश्वास ने उसकी हिम्मत बढ़ाई और अंततः निष्कर्ष यह निकला कि मनप्रीत के पिताजी ने मोहित को अच्छा नाम कमाने व शहर में अपनी पहचान बनाने के लिए एक साल का समय दिया, लेकिन इस एक साल में उन्होंने अपनी बेटी के लिए दूसरे रिश्ते देखना भी शुरू कर दिए।
जुदाई से बिगड़े हालात मोहित के प्रति अपने परिवार के कड़े रुख को देखकर मनप्रीत का तनाव बढ़ता गया और इस तनाव में उसने अपनी हालत इतनी बिगाड ली कि कुछ दिनों के लिए उसे हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा। मनप्रीत की एक किडनी पहले से ही कमजोर थी। यह बात मोहित को पता थी। शादी के लिए परिवारजनों के बढ़ते प्रेशर तथा मोहित से जुदाई के गम ने उस एक साल में मनप्रीत को इतना बीमार कर दिया था कि उसकी एक किडनी ने काम करना ही बंद कर दिया था।
मनप्रीत की बिगड़ती हालत देख उसे खुश करने के लिए उसके परिवारजनों ने ऑपरेशन से पहले मोहित को मनप्रीत से मिलने बुलाया। ऑपरेशन में मनप्रीत की एक किडनी निकालना पड़ी। लगभग 10-12 दिन तक मनप्रीत हॉस्पिटल में भर्ती रही। इस दौरान मोहित ने उसकी खूब सेवा की व अपने प्यार को अपनी हमसफर बनाने का विश्वास भी दिलाया। समय बीतने के साथ-साथ मनप्रीत और मोहित के प्यार ने उनके घरवालों का दिल भी जीत लिया और अब ये दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बँधने वाले हैं।