इन दिनों इमोशनल अत्याचार टीवी प्रोग्राम ने युवाओं में खासी खलबली मचा रखी है। रिश्तों में सचाई और झूठ को लेकर यह प्रोग्राम अपने तरीके से रोशनी डालने की कोशिश कर रहा है 'इमोशनल अत्याचार' एक टीवी प्रोग्राम है। अगर किसी पार्टनर या उसके संबंधियों को लगे की उनके साथ धोखा हो रहा है।
उसका पार्टनर उसके साथ बेवफाई कर रहा है तो ऐसे लोग इमोशनल अत्याचार की टीम से संपर्क करते हैं और उसके बाद यह टीम अपने जासूस को उस सशंकित साथी के पीछे लगा देती है। इसके बाद उस इंसान के पल-पल की घटनाओं को कैद किया जाता है।
इसके बाद उस इंसान का असली चेहरा उसके पार्टनर के सामने लाया जाता है। यह एक ऐसा रियलिटी प्रोग्राम है जिसमें खुफिया कैमरे की मदद से युवा अपनी गर्लफ्रेंड व अपने बॉयफ्रेंड की जासूसी करवाते हैं। इसमें टीवी चैनल की टीम पूरी तामझाम और स्पाय कैमरे से लैस होकर सचाई सामने लाने की कोशिश करती है। लेकिन आखिर रिश्तों में आए तनाव, दरार और बेवफाई को लेकर युवा क्या सोचते हैं।
शक से टेंशन
लड़का हो या लड़की हर कोई इन दिनों बिना सोचे-समझे ही नए रिश्ते बनाने लगे हैं। इससे हम पार्टनर की बेवफाई के शिकार हो जाते हैं। इसके लिए हमारा नजरिया भी मायने रखता है। जैसे हमारा पार्टनर हमारे सामने किसी दूसरी लड़की से कुछ ज्यादा ही बातचीत करने में व्यस्त होकर हमें तवज्जो नहीं देता, तो हमें लगता है कि वह हमारे इमोशंस के साथ अत्याचार कर रहा है। यह शक ही टेंशन बढ़ा देता है।
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बढ़ता शक
हम हर नया रिश्ता बनाने से पहले यह सोचते हैं कि वह व्यक्ति हमारे लिए ही बना है लेकिन कई बार यह विश्वास ही टेंशन की शुरूआत करता है। पार्टनर व हमारे बीच यदि कोई इंसान आ जाए तो हमारे रिश्तों के बीच हर पल शक बढ़ता ही जाता है। इससे हम उस पर हर बार नए-नए तरीके से निगाह रखने की कोशिश करते हैं। कोचिंग हो या कॉलेज, दोस्तों के साथ या कहीं और, इस मानसिकता को ये शो बढ़ावा देते हैं। प्यार केवल दो दिलों का मेल ही नहीं बल्कि यह नए रिश्तों की नई परिभाषा भी बनाता है।
यदि प्यार के पीछे धोखे की भावना और कोई लालच छुपा होता हो तो प्यार में दगाबाजी का नया सिलसिला शुरू हो जाता है। यह प्यार ही जिंदगी बर्बाद करने का माध्यम बन जाता है। फिर उस इंसान की जिंदगी में शुरू हो जाता है "इमोशनल अत्याचार"।
इन दिनों कई युवा जो़ड़े नए रिश्तों को बनाने में इतनी जल्दबाजी कर देते हैं कि वे एक-दूसरे को समझने तक का समय नहीं देते हैं। इसलिए महानगरों की मॉर्डन लाइफ स्टाइल में अब हर दिन ऐसे लोगों के साथ इमोशनल अत्याचार हर दिन बढ़ता ही जा रहा है। इस अत्याचार का कारण केवल धोखा ही नहीं बल्कि एक-दूसरे पर किया जाने वाला शक भी सबसे बड़ा कारण है।
अब नए तरीके अपनाने भी लगे
कॉलेज कैम्पस लाइफ में नए रिश्ते बहुत जल्दी बन जाते हैं फिर वह चाहे दोस्ती के हों या प्यार के। लेकिन इन रिलेशंस के इमोशंस के साथ अत्याचार की भी शुरुआत हमारे शक से ही शुरू होती है। यह शो केवल इमोशन की मार्केटिंग ही कर रहा है। इस शो में दिखाए गए बेवफाई को पकड़ने के कई तरीके रीयल लाइफ में अपनाने लगे हैं। जैसे अपने पार्टनर के मोबाइल फोन में कभी एसएमएस चेक करते हैं तो कभी फोनबुक। इससे कई बार रिश्तों में प्यार कम और शक गहरा होता जाता है। ऐसे नए शो में शक करने की मानसिकता बढ़ती जाती है।
लाइफस्टाइल भी है जिम्मेदार
कई बार पार्टनर व हमारे बीच रिश्तों में तनाव के लिए हमारी लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार होती है। हम अपने आप को 21वीं सदी की मॉर्डन लाइफस्टाइल में जीने वाला एक मॉर्डन व्यक्ति जरूर कहते हैं लेकिन आज भी हमारी मानसिकता अठारहवीं सदी के आदमी जैसी ही है।