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पत्रकारिता की भाषा

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टेलीविजन पत्रकारिता पर आई एक नई किताब में भाषाई प्रयोग को समझाने की कोशिश की गई है। किताब में किताबी नहीं, व्यावहारिक बातें बताई हैं। किताब में टेलीविजन की दुनिया के अनुरूप शब्दों और वाक्यों के बारे में बताया गया है। स्लग, टॉपिक, प्रोमो, हेडलाइंस, एंकर या फिर रिपोर्टर की भाषा पर अलग-अलग चैप्टर बनाकर विस्तारपूर्वक बताया गया है। नए पत्रकार इस किताब से टेलीविजन पत्रकारिता की दुनिया से वाकिफ हो सकेंगे। वे टीवी की दुनिया की भाषा से परिचित हो सकेंगे। इसमें स्क्रीप्टिंग के बारे में विस्तार से बताया गया है। स्क्रिप्ट, एंकर की भाषा और रिपोर्टर की जुबान पर अलग-अलग चर्चा की गई है। किताब के आमुख को टेलीविजन की दुनिया के वरिष्ठतम पत्रकारों में से एक राजदीप सरदेसाई ने लिखा है। उनका कहना है कि टेलीविजन न्यूज मीडिया में लोगों का भरोसा फिर से कैसे बहाल किया जाए, इसके लिए सही भाषा की समझ जरूरी है।

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