मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन हमारे बीच नहीं रहे। बावजूद इसके विवाद हैं कि थमने का नाम ही नहीं ले रहे। कलाकार किसी भी देश-प्रदेश का नहीं, बल्कि दुनिया का होता है। उसका हुनर ही उसे दूसरों से अलग यह पहचान देता है। हुसैन साहब के कौशल पर बात करना, 'छोटा मुँह बड़ी बात' करने जैसा है। बहरहाल अभी तो बात बत्ती गुल की। आज हमारा प्रश्न हुसैन साहब पर ही था। प्रतिभागियों में खासा उत्साह था। वाकई अच्छा लगा।
प्रश्न था कि हुसैन साहब ने किस देश की नागरिकता ली थी?
विकल्प- नहीं अब तो बस।
सबसे पहले मिले हैं, भरत दुधानी। हाँ तो सही जवाब क्या होना चाहिए। लंदन होना चाहिए, वहीं उनकी मृत्यु भी हुई। (हाँ, मगर हमारा प्रश्न जरा अलग है) अअ... वो मैंने पढ़ा तो था, लेकिन अभी याद नहीं आ रहा (ठीक है, जब याद आए तब बताना)। फिलहाल तो आपकी बत्ती गुल हो गई है।
निखिल करोड़िया, बताएँ कि जवाब क्या होगा। इनका कहना था कि पहले आप प्रश्न बता दो, फिर हम बताएँगे कि भाग लेंगे या नहीं। अच्छा चलिए पूछिए। हाँ तो प्रश्न है कि हुसैन साहब ने किस देश की नागरिकता ली थी। अअ... लंदन... नहीं, वहाँ तो मृत्यु हुई थी। टर्की होना चाहिए, सही जवाब। नहीं दोस्त आपकी भी बत्ती गुल हो गई।
हाँ तो दोस्त अरुणेश द्विवेदी आप क्या कहते हैं। इनकी मुख मुद्राएँ ही कुछ ऐसी हैं। पहले तो सब ठीक था। प्रश्न सुनकर ही यह हाल है। खैर, दोस्त बताएँ कि जवाब क्या है? अअ... यमन ही होना चाहिए, क्योंकि वे किसी इस्लामिक देश में ही गए थे। चलिए इसे ही लिख लेते हैं, मगर बत्ती गुल है आपकी।
हाँ दोस्त रामशरण गुप्ता। आप क्या कहते हैं... मुझे लगता है कि यमन ही सही जवाब होगा, क्योंकि वे गल्फ कंट्रीज में ही गए थे रहने के लिए (हमें तो आप केवल एक देश का नाम बताएँ तो बेहतर होगा)। फिर यमन ही लिख लीजिए। नहीं नहीं लंदन लिखिए। यही सही जवाब होना चाहिए। दोस्त हो गई ना बत्ती गुल।
फिर मिले हैं दोस्त अंकित जैन। हाँ तो बताएँ कि सही जवाब क्या होना चाहिए। अअअ... मम... ये जवाब लंदन होना चाहिए। या फिर टर्की होगा। कारण ऐसा ही कुछ नाम था उस देश का, जहाँ की उन्होंने नागरिकता ली थी । कोई एक नाम बताएँ? टर्की लिख लीजिए। फिर देखते हैं कि क्या होता है। चलिए आपकी भी बत्ती गुल हो गई।एमएफ हुसैन की लंदन में मृत्यु हुई और उन्होंने कतर की नागरिकता ली थी। इस चित्रकार ने केनवास पर ऐसी कलाकृतियाँ रची, जो वर्षों तक नहीं भुलाई जा सकेंगी। इस कलाकार को हमारा शत-शत नमन्। और हाँ, भ्रष्टाचार की लड़ाई को रामलीला मैदान में ही नहीं, बल्कि अपने अंदर भी जारी रखिए।