बत्ती गुल कॉलम के लिए मैंने आज तक्षशिला कैम्पस का रुख किया। हर तरफ छात्र-छात्राएं किसी न किसी मामले को लेकर एकदूसरे से बातचीत कर रहे हैं। पूरे माहौल में एडमिशन की गहमा-गहमी है। इसी दौरान मौज-मस्ती का पुट और नए रिश्तों की सुगबुगाहट भी दिखी। इसमें कोई दो मत नहीं कि युवाओं में हर प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवटता के साथ जीवन बिताने की ताकत होती है। ऊर्जा और उमंग होती है। उसका उत्साह कभी खत्म नहीं होता। यही कारण है कि इस कैम्पस में उत्साही युवा नजर आ रहे हैं। वे अपने वर्तमान को लेकर मस्त हैं तो करियर को लेकर कुछ सचेत और सजग भी। यहां कि गहमा-गहमी के बीच हमारी मुलाकात होती है कुछ युवाओं से। सबसे पहले हमारी मुलाकात हुई दो दोस्तों से। इनमें शामिल थे राजेंद्र सिसौदिया और संजय कौशिक। हमने इनसे बत्तीगुल में शामिल होने का जिक्र किया। ये सहर्ष तैयार हुए। आगे का हाल पढ़िए...
प्रश्न - किस मंदिर से 700 करोड़ का खजाना मिला है? यह कहाँ है?
विकल्प- (अ) तिरुअनंतपुरम (ब) पंजाब (स) राजस्थान (द) रामेश्वरम्
हाँ तो दोस्त राजेंद्र... आप बताएँ कि जवाब क्या होना चाहिए। अअम... वो केरल में है ना वो मंदिर है यार। कल ही इंटरनेट पर पढ़ रहा था, मगर कौन से भगवान का है यह नहीं मालूम। (अरे हमें तो जगह का नाम चाहिए) हाँ हाँ... अअ... पर केरल तो है ही नहीं। ये तिरुअनंतपुरम् होना चाहिए। इसी को लिख लीजिए। सही ही होगा। आप कहते हैं तो लिख लेते हैं।
हाँ तो भाई... संजय आप बताएँ कि जवाब क्या होना चाहिए। अअम... वो मुझे भी ऐसा ही कुछ लग रहा है। (यह हम लोगों को लगता बहुत है... नहीं...) खैर। आप विकल्प तो दो। अरे इसमें क्या विकल्प। चलिए सुन लीजिए... फिर से। हाँ तो पंजाब और राजस्थान तो हो ही नहीं सकते। रामेश्वरम् तीर्थ का नाम है। इसलिए तिरुअनंतपुरम् ही होना चाहिए।
हाँ तो दोस्त... उमेश बताएँ कि जवाब क्या होगा? सर, अअ... मुझे यह याद है कि तिरुअनंतपुरम् में है मंदिर। (वाह यार क्या बात है) फिर तो कुछ और भी पता होगा आपको। हाँ इसमें छः तहखाने हैं। अभी एक ही में से यह खजाना निकला है। बस... बस... बस... कमाल कर दिया यार। कुछ नहीं बहुत कुछ पता है। अच्छा लगा यह सब सुनकर। बिना विकल्प जवाब मिल गए।
लो भाई यहाँ तो पहले से ही चेहरे पर मुस्कान। दोस्त... दीपक जवाब दें। सर... एक बार विकल्प सुनना है। (अरे मुझे तो लगा कि सब पता है) नहीं... एक बार विकल्प सुनना है। फिर ही बात बनेगी। चलिए सुन लीजिए। विकल्प सुनने के बाद। हाँ ये तिरुअनंतपुरम् में ही होगा। बाकी नाम तो अलग ही लग रहे हैं। कारण यह है कि मंदिर का नाम दक्षिण भारतीय था। तो यही होगा। सही जवाब तिरुअनंतपुरम् है। यहाँ पद्मनाभास्वामी मंदिर से यह खजाना निकला है। आज सभी की बत्ती जल गई। अच्छा लगा। जाते-जाते बत्ती गुल के माध्यम से इस सफर को सफल बनाने वाले तमाम प्रतिभागियों, पाठकों, प्रशंसकों, आलोचकों आदि का शुक्रिया अदा करता हूँ। उम्मीद है कि जीवन के किसी मोड़ पर किसी और रूप में मुलाकात जरूर होगी। अच्छा तो हम चलते हैं...।