जब भयानक खबरें आती हैं तब पता लगता है कि वहाँ क्या हो रहा था। इंदौर के पास राऊ में एक पटाखा फैक्टरी में जो धमाका हुआ, उसमें सिर्फ छह लोग ही नहीं मारे गए हैं। यह दुर्घटना बताती है कि इसमें वह एक व्यवस्था मारी गई है, जो अपने आसपास क्या घट रहा है , उससे लगातार अनजान बनी रहती है और अपनी जिम्मेदारी से लगातार आँखें मूँदी रहती है। यह अक्षम्य लापरवाही ही लोगों का जीवन खतरे में डालती है।
छह लोगों के मारे जाने से यह पता चला है कि राऊ में कई लोग बारूद के ढेर पर बैठे हुए हैं। अब इस दुर्घटना के बाद वह सब हो रहा है, जो इस दुर्घटना के पहले हो जाना चाहिए था। एक तरफ राऊ को पटाखा मुक्त करने का अभियान चलाया जाएगा, जाँच होगी, पुलिस बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर हर घर की तलाशी ले रही है तथा अवैध फैक्टरियों पर कार्रवाई की जाएगी। यह सब होगा, लेकिन लोगों के मर जाने के बाद होगा। लोगों का जीवन बचा रहे, उनका जीवन सुरक्षित रहे, इसके लिए कुछ नहीं होगा।