भारत सरकार ने विदेशों में बसे भारतीयों के लिए कई सुविधाओं के अलावा विदेशों में भारत के पक्ष और संस्कृति को फैलाने के उद्देश्य से कई कार्य किए हैं।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) का प्रमुख उद्देश्य भारत और अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध कायम करना, बहाल करना और सुदृढ़ करना है। परिषद ने प्रमुख सम्मेलनों, जैसे भारत अफ्रीका शिखर सम्मेलन, इब्सा शिखर सम्मेलन, अरब लीग बैठक आदि के अवसर पर बड़े पैमाने पर सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया, जिनमें विदेशी व भारतीय मंडलियों ने हिस्सा लिया। परिषद ने दक्षिण एशिया सांस्कृतिक समारोह, मल्हार समारोह और भारत में रहने वाले विदेशी कलाकारों द्वारा भारतीय शास्त्रीय नृत्य जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं।भारत में रूसी वर्ष मनाना व इसके अतिरिक्त परिषद ने विभिन्न देशों से 50 सांस्कृतिक टोलियों की मेजबानी की और दिल्ली तथा अन्य शहरों में उनके कार्यक्रमों का आयोजन कराया। परिषद ने स्वयंसेवी संगठनों और सांस्कृतिक संस्थानों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की, ताकि वे विस्तृत रूप से सांस्कृतिक गतिविधियों का भी आयोजन कर सकें। विशिष्ट आगंतुक कार्यक्रम के अंतर्गत परिषद ने विभिन्न देशों से 19 जाने-माने कलाकारों को आमंत्रित किया। विदेश स्थित 21 भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों ने भारत की सांस्कृतिक धरोहर को इन देशों में लोकप्रिय बनाना आरंभ कर दिया है। बीजिंग में इसी सिलसिले में भारतीय दूतावास की रिंग ने काम करना शुरू कर दिया और बैंकॉक, कुआलालम्पुर, टोकियो और ढाका में नए विस्तारित सांस्कृतिक केंद्र खोलने की तैयारी की गई। रूस में भारतीय वर्ष भी मनाया। इसके अलावा परिषद ने 93 सांस्कृतिक शिष्टमंडलों को प्रायोजित किया, जिन्होंने 73 देशों की यात्रा की। इसके अलावा विदेश स्थित अनेक प्रतिभाशाली कलाकारों को भी प्रायोजित किया गया और उन्हें यात्रा अनुदान प्रदान किया गया। परिषद ने विभिन्न विदेशी विश्वविद्यालयों में भारतीय अध्ययन संबंधी 21 दीर्घावधि और 12 अल्पावधि पीठों का संचालन भी जारी रखा है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र विदेशी विद्यार्थियों को भारतीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश की सुविधा प्रदान करना भी है। वृत्त चित्रों का प्रदर्शन डिविजन द्वारा तैयार किए गए वृत्त चित्रों में भारत के हितों और देश की संस्कृति एवं धरोहर को प्रदर्शित किया गया है।
डिविजन द्वारा बनाए गए कुछ वृत्त चित्रों को अंतरराष्ट्रीय समारोहों में प्रदर्शित किया गया और उन्हें विशेष पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। डिविजन की प्रमुख पत्रिका इंडिया पर्स्पेक्टिव में विविध विषयों पर सामग्री प्रकाशित की जाती है।जन कूटनीति जन कूटनीति डिविजन भारत के भीतर और बाहर संपर्क गतिविधियों को अंजाम देने और व्यापक जनसमुदाय के समक्ष नीति को प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत करने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत और विदेश में अनुसंधानकर्ताओं, विचारकों, सिविल सोसाइटी, मीडिया और उद्योग के सहयोग से काम करता है। भारत की विदेश नीति को प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत करने और अन्य देशों के साथ द्वितीय स्तर पर वार्तालाप करने के लिए अनेक सेमिनारों और सम्मेलनों का आयोजन किया जाता रहा है। डिविजन की प्रमुख गतिविधियों में नेपाल, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और इथियोपिया के साथ भारत के संबंधों को लेकर सम्मेलन का आयोजन करना शामिल था। अन्य देशों के नीति और जनमत निर्माताओं को आधुनिक भारत और हमारी चिंताओं तथा हितों से परिचित कराने के लिए डिविजन ने ब्रिटेन, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका, तजाकिस्तान और ताईवान के शिष्टमंडलों के अलावा पत्रकारों की यात्राओं का आयोजन भी किया जाता रहा है।विदेश सेवा संस्थान भारत सरकार ने 1986 में विदेश सेवा संस्थान (एफएसआई) की स्थापना की थी। इसका प्रमुख लक्ष्य विदेश मंत्रालय की भारतीय विदेश सेवा की व्यावसायिक प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करना है। संस्थान ने अपनी गतिविधियों का विस्तार करते हुए विदेश मंत्रालय के सभी स्तरों के कर्मचारियों और अधिकारियों, अन्य सिविल सेवाओं और विदेशी राजनायिकों तथा संवाददाताओं के लिए पाठ्यक्रमों को उनमें शामिल किया है। एफएसआई विदेश मंत्रालय के स्टॉफ, आईएफएस परिवीक्षाधीन अधिकारियों, निदेशकों और संयुक्त सचिवों के लिए भी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का आयोजन और संचालन करता है। इसके अतिरिक्त यह अन्य सिविल सेवाओं, विदेशी राजनयिकों और कूटनीतिक पत्रकारों के लिए भी पाठ्यक्रमों का संचालन करता है।