ऊर्जा आर्थिक विकास और जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए एक आवश्यक साधन है। समाज में ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को उचित लागत पर पूरा करने के लिए ऊर्जा के पारंपरिक संसाधनों के विकास की जिम्मेदारी सरकार की है। ऊर्जा के गैर परंपरागत, वैकल्पिक, नए और फिर से उपयोग में लाए जा सकने वाले स्रोतों, जैसे सौर, पवन और जैव ऊर्जा आदि के विकास और संवर्द्धन पर जोर दिया जा रहा है। परमाणु ऊर्जा के विकास को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
* भारत में बिजली का विकास 19 वीं सदी के अंत में शुरू हुआ। सन 1897 में दार्जिलिंग में बिजली आपूर्ति शुरू हुई और उसके बाद सन 1902 में कर्नाटक में शिवसमुद्रम में पनबिजलीघर काम करने लगा। स्वतंत्रता से पहले बिजली की आपूर्ति मुख्य तौर पर निजी क्षेत्र करता था और यह सुविधा भी कुछ शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित थी।
* अगली दो पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान 1,00,000 मेगावॉट की अतिरिक्त विद्युत क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है। दसवीं योजना में 21,180 मेगावॉट क्षमता जोड़ी गई और 11वीं योजना में 78,700 मेगावॉट।
राष्ट्रीय पावर ग्रिड
* देश में चरणबद्ध ढंग से एक समन्वित (एकीकृत) राष्ट्रीय पावर ग्रिड की स्थापना की योजना बनाई गई। इसका पहला चरण पूरा हो गया है और अब तक सभी क्षेत्रीय ग्रिडों को जोड़ा जा चुका है।
* ग्यारहवीं योजना में 24600 मेगावॉट क्षमता अंतरक्षेत्रीय पारेषण तंत्र में जोड़ने की योजना बनाई गई। इससे राष्ट्रीय ग्रिड की कुल अंतरक्षेत्रीय पारेषण क्षमता बढ़कर 38650 मेगावॉट हो जाएगी।
* केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण विद्युत आपूर्ति अधिनियम, 1948 की धारा 3(1) के अंतर्गत गठित एक वैधानिक संगठन है। अब यह संगठन विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 70(1) से नियंत्रित होता है। प्राधिकरण बिजलीघरों के निर्माण, बिजली लाइनों और राष्ट्रीय ग्रिड के विकास, मीटरों के प्रतिस्थापन और संचालन, पनबिजली परियोजनाओं के अनुमोदन और सुरक्षा तथा ग्रिड मानक तय करता है।
बचल लैम्प योजना
* बचत लैंप योजना 28 मई 2008 को शुरू की गई। इसके अंतर्गत घरेलू उपभोक्ताओं को 15 रुपए प्रति सीएफएल बल्ब की दर से उपलब्ध कराए जाते हैं। यह बल्ब इनकैंडेसेंट बल्बों के समान ऊर्जा कुशल होते हैं। इससे सीएफएल बल्बों के महँगे होने की बाधा दूर होती है। 40 करोड़ इनकैंडेसेंट बल्बों को बदलने का यह कार्यक्रम है, जिसके परिणामस्वरूप करीब 6000 मेगावॉट बिजली की बचत होगी और प्रतिवर्ष 2.4 करोड़ टन कार्बन-डाई-ऑइक्साइड उत्सर्जन भी कम होगा।* देश में पैदा की गई बिजली का 27 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होता है। दस प्रतिशत नगर पालिकाएँ करती हैं।* देश की दो राष्ट्रीय तेल कंपनियाँ तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) और ऑइल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) तथा निजी एवं संयुक्त उपक्रम कंपनियाँ देश में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज तथा उत्पादन में लगी हैं। मिथेन सुरक्षित ईधन * कोयला खानों से प्राप्त मिथेन गैस भी सुरक्षित ईंधन है। इसके नए स्रोत तथा इसके उत्पादन के लिए सरकार ने नीति बनाई है। इसके अलावा तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड, ओएनजीसी देश लिमिटेड, ऑइल इंडिया लिमिटेड, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) भी अपने-अपने क्षेत्रों में तेल व गैस के शोधन व अन्य कार्य कर रहे हैं।कोयले का भंडार * भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार 1 जनवरी 2006 को देश में 1200 मीटर की गहराई तक सुरक्षित कोयले का भंडार 2,53,300 मिलियन टन था। * भारत में गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत जैसे- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा तथा जैव ईंधन की भरमार है। पुनर्उपयोगी ऊर्जा स्रोतों का महत्व हमारे देश में 1970 के दशक के शुरुआत में समझा गया। भारत अब पुनर्उपयोगी ऊर्जा के बड़े कार्यक्रम चलाने वाले देशों में से एक है। अनेक पुनर्उपयोगी ऊर्जा प्रणालियाँ और उपकरण अब व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं। * भारत विश्व के ऐसे भाग में स्थित है, जहाँ सूर्य का प्रकाश प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। भारत को प्रतिवर्ष 5000 ट्रिलियन किलोवॉट घंटा के बराबर ऊर्जा मिलती है। प्रतिदिन का औसत भौगोलिक स्थिति के अनुसार 4-7 किलोवॉट घंटा प्रति वर्ग मीटर है। वैश्विक सौर रेडिएशन का वार्षिक प्रतिशत भारत के संबंध में प्रतिदिन 5.5 किलोवॉट घंटा प्रति वर्ग मीटर है। उच्चतम वार्षिक रेडिएशन लद्दाख, पश्चिमी राजस्थान तथा गुजरात में एवं निम्नतम रेडिएशन पूर्वोत्तर क्षेत्रों में प्राप्त होता है।सौर वाष्प प्रणाली * खाना बनाने के लिए विश्व की सबसे बड़ी सौर वाष्प प्रणाली आंध्र प्रदेश में तिरुमला में स्थापित की गई। इससे 15000 लोगों का खाना एकसाथ बनाया जा सकता है।* भारत में कम से कम 45,000 मेगावॉट की पवन ऊर्जा की क्षमता आँकी गई है। 31 मार्च 2008 तक कुल मिलाकर 8,757 मेगावॉट क्षमता जोड़ी गई है, जिससे जर्मनी, अमेरिका और स्पेन के बाद भारत विश्व में पाँचवें स्थान पर पहुँच गया है।* सौर फोटोवोल्टेक कार्यक्रम के अंतर्गत मार्च 2008 तक देशभर में लगभग 6.7 लाख सौर लालटेनें, 4.03 लाख सौर गृह प्रकाश प्रणालियाँ, 70,500 गली बत्तियाँ, 7,148 सौर नल पंपिंग प्रणालियाँ, 2.2 मेगावॉट क्षमता वाले स्टैंड अलोन बिजलीघर और 2.2 मेगावॉट बिजली ग्रिड में देने वाले संयंत्रों की स्थापना की गई है।