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महसूस करो बदलाव की लहर को

अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त 2011

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युवा
- विपुल रेगे
ND

हमारा देश संसार का सबसे युवा देश है। इसमें 50 करोड़ लोग 24 साल से कम उम्र के हैं, लेकिन हमारे केंद्रीय मंत्रिमंडल की औसत आयु 60 साल है। देश पर बूढ़ा नेतृत्व थोपने की यह मानसिकता राजनीति समेत हर क्षेत्र में युवाओं के हौंसले पस्त कर रही है। ईमानदारी और देशभक्ति की बातें करते तथाकथित नेताओं के कारण उन्हें ये मूल्य आउटडेटेड लगने लगे थे। फिर अपने इस्पाती इरादों से लैस मैदान में उतरे अण्णा हजारे जैसे बुजुर्ग युवा से प्रभावित होकर इन नौजवानों में बदलाव करने की एक लहर उठी है। हमारे देश का यह बदलता चेहरा मजबूत इरादों वाले युवा भारत का नया चेहरा है। किसी ने सच ही कहा है कि जिंदा कौमें 5 हजार साल इंतजार नहीं करतीं। देश की ये जिंदा कौम 16 अगस्त को लोकपाल बिल के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने जा रही है। बदलाव की इस आहट से इंदौर भी आँखें मलकर जाग उठा है। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के माहौल में चल रही बदलाव की इस लहर को महसूस करने की जरूरत है। ऐसे मौके पर नईदुनिया युवा की बी द चेंज मुहिम भी युवाओं को अपनी समस्याओं से लड़ने का एक मंच दे रही है।

8 अगस्त की रात 8 बजे सपना- संगीता टावर चौराहे पर जब तेज गिरती बारिश से बचने के लिए लोग घरों की ओर भागे जा रहे थे तब वंदे मातरम और भारतमाता की जय के नारों ने उस बरसाती रात में वहाँ से गुजर रहे लोगों का ध्यान आकर्षित कर लिया। कुल जमा आठ लोग, जिनमें चार युवा थे। अण्णा की तरह गाँधी टोपी लगाए ये लोग लोकपाल बिल के लिए उस बरसाती रात में समर्थन जुटाने निकले थे। ये दृश्य बेहद आह्लादित करने वाला था। संभ्रांत परिवारों के नजर आ रहे इन युवाओं को देखकर लगा कि अपना इंदौर साँस लेता जिंदा शहर है। वे भले ही संख्या में कम थे, लेकिन उनकी मुट्ठी में दम था और नारों में जोश। अपनी व्यस्त जिंदगी में से कुछ समय निकालकर और सब कुछ भूलकर वे देश के लिए सड़कों पर उतरे। दरअसल करप्ट सिस्टम और निरंकुश राजनीति से टकरा पाना हमारे दमदार युवाओं के ही बस की बात है। सड़क पर समर्थन जुटा रहे इन चंद नौजवानों की तरह ही बदलाव के नए तरीके निकालने होंगे।

उतरो राजनीति में
यह बताने की जरूरत नहीं कि भारत के युवाओं का दम खेल से लेकर बड़े बिजनेस घरानों तक दिखाई देता है। हमारे युवा ने हर क्षेत्र में खम ठोंककर जीत हासिल की है, लेकिन राजनीति एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ युवाओं का प्रतिशत बेहद कम है। मौजूदा सरकार में केवल तीन मिनिस्टर सचिन पायलट, अगाथा संगमा और मिलिन्द देवड़ा 35 से कम उम्र के हैं। खुद को युवा नेता मानने वाले राहुल गाँधी भी बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार करना नहीं चाहते और यही हाल देश के युवाओं का भी है। देश के विकास के लिए जिम्मेदार अतिमहत्वपूर्ण राजनीति में हमारी पैठ क्यों नहीं है। इन कीचड़ से भरी दीवारों को साफ करने की शुस्र्आत कहीं से तो करना होगी। बूढ़े प्रधानमंत्रियों के वृद्ध फैसलों से कराह रही कुर्सी को जाने कबसे युवा हाथों की पकड़ का शिद्‌दत से इंतजार है।

चाहिए जलते दीपक
युवा की बी द चेंज मुहिम एक मंच है, जिसकी मदद से युवा अपने शहर, अपने देश की किसी भी समस्या के लिए मजबूत ढंग से अपना पक्ष रख सकते हैं। बी द चेंज की ताकत इस पर निर्भर है कि कितने युवा इसका हिस्सा बनेंगे। बी द चेंज आपको बताएगा कि कैसे नेटवर्क को अपनी ताकत बनाया जा सकता है। फेसबुक और टि्‌वटर को कैसे क्रांति की धारदार तलवार बनाया जा सकता है। आप जहाँ हैं, वहीं से अपना योगदान दें। यदि अब भी आपकी नींद नहीं खुलती तो याद रखिए कि तैयार हो रही भावी पीढ़ी आपको कभी माफ नहीं करेगी। इस मुहिम से देश के सारे युवा तो कतई नहीं जुड़ेंगे, लेकिन मुहिम से जुड़ने वाले कुछ हजार या लाख युवा जलते हुए दीयों की तरह होंगे, जिनमें और दीपक जलाने का भी माद्‌दा होगा। इस मुहिम में यूथ आइकॉन रघु और राजीव लगातार साथ रहेंगे।

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