गाँधी ने भी उपवास किए हैं। उनके उपवास का खास मकसद हुआ करता था। अब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उपवास किया है। संतों के हाथ से नीबू रस लेकर उन्होंने अपना उपवास तोड़ा है। उन्होंने डॉयलॉग मारा है कि अब लीडर को एक्शन में आना होगा। उन्होंने यह उपवास गुजरात के साथ सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर किया था। गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्वकाल में जो दंगे हुए हैं, वे देश के भयावह दंगों में से हैं।
अब वे कह रहे हैं कि उनके राज्य में अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। वहाँ सांप्रदायिक सौमनस्य है और गुजरात के साथ सांप्रदायिक सद्भाव किया जाए, इसके लिए उन्होंने उपवास किया। जाहिर है गाँधी ने उपवास और अनशन को लोकतंत्र में अन्याय के खिलाफ एक हथियार बनाया था। नरेंद्र मोदी ने यह उपवास कर उसे उलट दिया है।