दिल्ली हाई कोर्ट परिसर में हुए बम ब्लास्ट में 12 लोग मारे गए। 85 से ज्यादा घायल हुए हैं। आरोपियों के स्केच जारी किए गए हैं। कुछ की गिरफ्तारियाँ हुई हैं। अब जाँच होगी, खामियों पर बात होगी, लेकिन जिनकी जानें गईं उनका क्या कसूर था? सरकार मृतकों और घायलों को मुआवजा देगी। यह राजनीति का स्थायी भाव है। देश के नागरिकों के प्रति उसका यही रवैया रहा है। यह राजनीति एक ऐसी व्यवस्था करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है, जिसमें लोगों की जानें बचाई जा सकें।
उन्हें एक सुरक्षित जीवन देने की कोई माकूल व्यवस्था नहीं होती। हाँ, मुआवजा देने की पूरी व्यवस्था होती है। यह कितना दुःखद पहलू है कि देश के जनप्रतिनिधियों ने उस व्यवस्था के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, जिसमें एक नागरिक अपना पूरा जीवन जी सके। आतंकी हमले होते रहेंगे, लोग मरते रहेंगे और यह सरकार उन्हें मुआवजा देती रहेगी। हम एक ऐसे देश में रह रहे हैं, जहाँ नागरिकों को मौत के बदले सिर्फ मुआवजा मिलता है।