दो खबरें बहुत बुरी हैं और दोनों ही खबर जनता पर बहुत बुरा असर डाल रही हैं। इन दोनों खबरों में एक अंतर्संबंध भी देखा जा सकता है। पहली खबर तो यह है कि त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है और महँगाई कम करने की गंभीर कोशिशें नहीं की जा रही हैं। लगता है सरकार भी इस ओर से उदासीन, बल्कि लापरवाह रवैया अख्तियार किए हुए है। दूसरी बुरी खबर यह है कि मानसूत्र सत्र के दौरान एक हफ्ते में 35 करोड़ रुपए से ज्यादा बर्बाद किए जा चुके हैं।
जाहिर है हंगामा होगा तो इससे जनता की किसी समस्या का कोई सार्थक और रचनात्मक हल निकलने की संभावना भी नहीं। कहा ही जाना चाहिए कि जिस राजनीति और हमारे जनप्रतिनिधियों को जनता के हित में आवाज उठाना चाहिए, जिन प्रतिनिधियों को जनता की समस्या पर संसद में गंभीर विचार-विमर्श और बहस करना चाहिए वह नहीं हो रही है, बल्कि हंगामे में समय और पैसा बर्बाद किया जा रहा है। यह राजनीति का निहायत ही असंवेदनशील रवैया है।