Article Yuva %e0%a4%af%e0%a4%b9 %e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be %e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%80 %e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5 %e0%a4%b9%e0%a5%88 111092200124_1.htm

Festival Posters

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

यह हमारा स्थायी भाव है

नॉट

Advertiesment
हमें फॉलो करें नॉट
ND
राष्ट्रीय चिह्नों या खेलों से हमारा बर्ताव यही है। ये लगभग अपमानजनक व्यवहार लगातार सहते आए हैं। कई बार लगता है इस तरह से राष्ट्रीय चिह्न, पशु या पक्षी या फिर खेल से यह व्यवहार हमारा स्थायी भाव बन गया है। इसकी एक झलक उस विवाद में देखी जा सकती है, जो हमारे राष्ट्रीय खेल हॉकी से जुड़ा है। और, कहने की जरूरत नहीं कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

एशियन चैम्पियनशिप जीत कर आई भारतीय हॉकी टीम को जीतने पर 25-25 हजार रुपए दिए गए और हॉकी टीम को लगा कि यह उनका अपमान है, लिहाजा उन्होंने चेक लौटा दिए। इसके बाद वबाल मचा और अब उन्हें कुछ-कुछ ठीक-ठाक राशि मिली है, लेकिन उनके साथ जो व्यवहार किया गया, वह हमारा स्थायी भाव है। हम हमेशा अपने राष्ट्र के साथ, उसके चिह्न के साथ और उसके खेल के साथ इसी तरह का व्यवहार करते हैं।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi