भारत के पड़ोसी देशों में अस्थिरता और बढ़ते आतंकवाद के कारण देश की रक्षा सेवाओं को और भी बेहतर बनाने की जरूरत महसूस काफी समय से की जाती रही है। इस ओर अब काफी तेजी से प्रयास भी आरंभ हो चुके हैं। देश में रक्षा मंत्रालय का प्रमुख काम है रक्षा और सुरक्षा संबंधी सभी मामलों पर सरकार से निर्देश प्राप्त करना और सशस्त्र बलों के मुख्यालयों, अंतर-सेना संगठनों, रक्षा उत्पादन प्रतिष्ठानों और अनुसंधान एवं विकास संगठनों तक कार्यान्वयन के लिए उन्हें पहुँचाना। सरकार के नीति-निर्देशों को प्रभावी ढंग से तथा आवंटित संसाधनों का ध्यान रखकर उन्हें कार्यान्वित करना भी उसका काम है।
थल सेना भारतीय थल सेना को दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी थल सेना माना जाता है। थल सेना का आधुनिकीकरण किया गया है। इसमें प्रमुख रूप से-
* गोलीबारी क्षमता में सुधार तथा गश्त में वृद्धि। * सभी मौसमों में युद्ध क्षेत्र निगरानी क्षमता। * रात्रि युद्ध की क्षमता। * विशिष्ट बलों की क्षमता में बढ़ोतरी।
* नेटवर्क आधारित युद्ध की क्षमता आदि। इसके अलावा पैदल सेना की टुकड़ियों को अधिक मारक क्षमता तथा रेंज वाले हथियार, टी-90 टैंक, ब्रह्मोस शस्त्र प्रणाली, मिसाइल और रॉकेट प्रणाली, थर्मल इमेजिंग उपकरण, बुलेट तथा माइन प्रूफ गाड़ियाँ तथा सुरक्षित रेडियो संचार उपलब्ध करवाया गया है।
नौसेना नौसेना भारतीय महासागरीय क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा प्रशांति की उत्प्रेरक है। भारतीय नौसेना ने अपनी क्षमता में काफी वृद्धि की है। जहाज, पनडुब्बियाँ, देश में और बाहर निर्मित की जा रही हैं।
कोच्ची में एयरक्रॉफ्ट करियर भी बनाया है। बीवीआर डर्बो मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया है। 6 यूएच 3 एच हेलिकॉप्टर शामिल किए गए हैं। भारतीय नौसेना के जहाजों की विदेशों में तैनाती देश की विदेश नीति में सहायक है। इस प्रकार के मिशन विदेशी मित्र देशों के साथ संबंधों की बेहतरी तथा विदेशी सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।
तटरक्षक समुद्री क्षेत्र में भारत के राष्ट्रीय हित की संरक्षा के लिए तटरक्षक कानून 1978 लागू होने के साथ ही 18 अगस्त 1978 को भारतीय तटरक्षक की स्थापना हुई थी। तटरक्षक का दायित्व भारत की सीमाओं में जलीय क्षेत्र तथा विशिष्ट आर्थिक जोन की नियमित निगरानी करना है, ताकि चोरी और तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।
वायु सेना भारतीय वायु सेना ने अति आधुनिक एसयू-30 एमकेआई एयरक्रॉफ्ट शामिल किया है। 20 हॉक एजेटी एयरक्रॉफ्ट भी शामिल किए गए हैं। मिग-29 को बीच में अपग्रेड करने और संपूर्ण तकनीकी जीवन के विस्तार के लिए रूस के आरएसी मिग के साथ करार पर हस्ताक्षर हुए हैं। अपनी क्षमताओं को और बढ़ाने के लिए वायु सेना मिराज 2000, जुगआर एयरक्रॉफ्ट तथा एमआई-17 हेलिकॉप्टरों को अपग्रेड करने की प्रक्रिया भी आरंभ कर चुका है।
डीओ-228 एयरक्रॉफ्ट को आधुनिक तकनीक से लैस रखने के लिए सभी मौजूदा एयरक्रॉफ्टों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है। मरम्मत के लिए पुर्जों को देश में ही निर्माण एक सतत प्रक्रिया है। वायुसेना की विभिन्न टुकड़ियों के लिए अस्सी हजार से अधिक पुर्जे बेस रिपेयर डिपो (बीआरडी) द्वारा इस्तेमाल किए गए हैं। बड़ी संख्या में ग्राउंड आधारित रडार शामिल किए जा रहे हैं।