खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग देश की खाद्य अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करता है। यह खाद्यान्न की खरीद उनके भंडारण, परिवहन एवं वितरण एजेंसियों तक उसकी आपूर्ति का कार्य करता है। देश में उपभोक्ता सहकारिता ढाँचे के चार स्तर हैं, जिनमें राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता परिसंघ लिमिटेड राष्ट्रीय स्तर का संगठन है। 30 राज्य सहकारी उपभोक्ता संगठन इस परिसंघ के साथ जुड़े हैं। केंद्रीय/थोक स्तर पर 800 उपभोक्ता सहकारी स्टोर हैं। प्राथमिक स्तर पर 21,903 प्राथमिक स्टोर हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 44,418 ग्राम स्तरीय प्राथमिक कृषि की ऋण समितियाँ और विपणन समितियाँ अपने सामान्य व्यापार के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं के वितरण में लगी हैं। शहरी और उप-नगरीय क्षेत्रों में करीब 37,226 खुदरा बिक्री केंद्रों का संचालन उपभोक्ता सहकारी समितियों द्वारा किया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी की जा सकें।
वायदा कारोबार और वायदा बाजार आयोग वायदा व्यापार आयोग एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना वायदा अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1952 के तहत की गई है। यह आयोग उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन काम करता है। आयोग वस्तुओं में वायदा कारोबार को मान्यता प्राप्त संगठनों के माध्यम से नियंत्रित करता है और वस्तुओं में अग्रिम व्यापार संचालन करने वाले संगठनों को मान्यता प्रदान करने/मान्यता समाप्त करने तथा देश में वायदा बाजार की कार्यप्रणाली में सामान्य सुधार लाने की सिफारिश करता है। वर्तमान में देशभर में कुल 24 एक्सचेंज कार्यरत हैं। इनमें से 3 राष्ट्रीय स्तर के एक्सचेंज हैं, जिन्हें देश में भविष्य/वायदा कारोबार के लिए मान्यता प्राप्त है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 यह अधिनियम उन सभी उपभोक्ता अधिकारों को सुरक्षित करता है, जिनको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया गया है। इस अधिनियम के अनुसार उपभोक्ता अधिकारों को बढ़ावा देने और संरक्षण देने के लिए केंद्रीय, राज्य एवं जिला स्तरों पर उपभोक्ता संरक्षण परिषद स्थापित किए गए हैं। उपभोक्ताओं को सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, चुनने का अधिकार, सुने जाने का अधिकार, उपचार का अधिकार, उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार प्राप्त है।
भारतीय मानक ब्यूरो भारतीय मानक ब्यूरो एक राष्ट्रीय मानक निकाय है, जिसके प्रमुख कार्य हैं- मानक तैयार कर उन्हें लागू करना, उत्पादों व प्रणाली दोनों ही के लिए प्रमाणन योजना संचालित करना, परीक्षण प्रयोगशालाओं का गठन व प्रबंधन, उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा करना तथा अंतरराष्ट्रीय मानक निकायों के साथ निकट संपर्क बनाए रखना शामिल है।
भारतीय खाद्यान्न प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्थान * हापुड़ स्थित भारतीय खाद्यान्न प्रबंधन एवं अनुसंधान संस्थान अनाज के भंडारण प्रबंधन से संबंधित अनुसंधान और विकास कार्य करता है। संस्थान के हैदराबाद, जोरहाट और लुधियाना में तीन क्षेत्रीय केंद्र हैं। संस्थान भंडारण एजेंसियों के अधिकारियों और कीट नियंत्रणकर्मियों के लिए अनाज के भंडारण, निरीक्षण, कीट नियंत्रण आदि पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है।
* देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की स्थापना जुलाई 1988 में की गई। मंत्रालय इस क्षेत्र में पूँजी निवेश बढ़ाने, उचित दिशा-निर्देश देने, निर्यात-प्रोत्साहन तथा उचित माहौल बनाने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है।
* यह गर्व की बात है कि भारत 1988 से विश्व के दुग्ध उत्पादक देशों में पहले स्थान पर है। विश्व दुग्ध उत्पादन लगभग 613 मिलियन टन का है, जो 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। भारत में 91 मिलियन टन दुग्ध का उत्पादन होता है और यह 4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। उच्च विकास दर के बावजूद भारत में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता (229 ग्राम प्रति दिन) विश्व औसत (285 ग्राम प्रति दिन) से कम है। भारत के कुल दुग्ध उत्पादन में 57 प्रतिशत योगदान भैंस के दूध का है।
* तौल और माप मानक अधिनियम, 1956 के अंतर्गत देश में मीट्रिक प्रणाली पर आधारित माप-तौल के एक समान मानक बनाए गए। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में तौल और माप इकाई इस विषय से सम्बद्ध सभी गतिविधियों के लिए एक प्रमुख एजेंसी है।
* राष्ट्रीय परीक्षण गृह का मुख्यालय कोलकाता में है और यह खाद्य, दवा और हथियार तथा गोलाबारूद को छोड़ कर सभी इंजीनियरिंग शाखाओं की सामग्री तथा उत्पादों के परीक्षण और मूल्यांकन से सम्बद्ध राष्ट्रीय महत्व की प्रयोगशाला है। -स्रोत वार्षिक संदर्भ-ग्रंथ भारत