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हमारी धरती, हमारा कोपनहेगन

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2010 दस्तक दे चुका है। नई रोशनी और नई उम्मीद के साथ। कोपनहेगन में ग्लोबल वॉर्मिंग से धरती और पर्यावरण को बचाने की कवायद की गई, लेकिन युवाओं की अपनी एक भीतरी धरती है। इसका अपना पर्यावरण है। लिहाजा बेहतर स्टूडेंट और अंततः बेहतर इंसान बनने के लिए भीतरी धरती के पर्यावरण को बचाना भी जरूरी है।

2010 की नई रोशनी में युवाओं को यह देखना होगा कि कौन सी दस चीजें उन्हें बचानी हैं। यदि वे इन दस चीजों का ध्यान रखेंगे तो अपने दिल पर हाथ रखकर कह सकेंगे कि भैया आल इज वेल। युवा के रिपोर्टर हिमांशु दुबे की रिपोर्ट-

कोपनहेगन में देश-विदेश के बड़े नेताओं ने बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने को लेकर कई दिनों तक चर्चा की। इसका उद्देश्य था पर्यावरण को बचाने के लिए तमाम जतन करना। कोपनहेगन में धरती को बचाने की चिंता तो की गई लेकिन क्या हम यह नहीं जानते कि हमारे भीतर भी अपनी एक हरी-भरी धरती है और भीतर के वॉर्मिंग से प्रभावित हो रही है।

युवाओं की इस भीतरी धरती पर वॉर्मिंग से कई चीजें खत्म हो रही हैं, विकृति हो रही है और उनके लिए कई तरह की परेशानियाँ पैदा कर रही हैं। इसलिए जिस तरह से कोपनहेगन में धरती को बचाने के जतन के लिए बातचीत की गई, ठीक इसी तरह नईदुनिया युवा ने भी युवाओं की भीतरी हरीभरी दुनिया को बचाने के लिए बातचीत की।

इसे व्यक्तित्व विकास से जोड़कर कुछ युवाओं से विचार-विमर्श किया गया कि आखिर किस तरह युवाओं की इस भीतरी और प्यारी दुनिया को बचाए रखा जा सकता है। हमने उनसे इस बारे में पूछा तो उनका मत था कि आत्मविश्वास, समर्पण, सहयोग से कोई भी व्यक्ति दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकता है।

1. आत्मविश्वास :
कई तरह के बाहरी प्रभावों के कारण स्टूडेंट्स अपना कॉन्फिडेंस खो रहे हैं। इसलिए अपने लक्ष्यों को वे पूरी ताकत से हासिल नहीं कर पा रहे हैं। मैनेजमेंट के स्टूडेंट राजीव विजयवर्गीय कहते हैं कि आत्मविश्वास एक बहुत बड़ा रोल अदा करता है। इसी के दम पर अपने गोल हासिल किए जा सकते हैं। हस्तियों ने अपनी कामयाबी की इबारत लिखी है। इसलिए हमें प्रतिकूल परिस्थितियों में अपना आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए।

2. समर्पण :
आज स्टूडेंट्स के सामने ऐसे कई लालच और विकृतियाँ हैं जिनके प्रभाव में आकर वे अपनी एकाग्रता और समर्पण की भावना भूल जाते हैं और अपनी राह भी भटक जाते हैं। इसलिए निभा कहती हैं कि मुझे लगता है कि किसी भी स्टूडेंट के लिए एकाग्रता और समर्पण बहुत मायने रखता है क्योंकि इन्हीं दो धुरियों के इर्द-गिर्द सफलता का पथ घूमता है। इसलिए हर स्टूडेंट को इन दो बातों को आत्मसात कर लेना चाहिए।

3. कटुता न हो :
आपका व्यक्तित्व कैसा है...कैसा बन सकता है...इन तमाम सवालों के जवाब आपके फ्रेंड सर्कल के द्वारा भी किसी को मिल सकते हैं। अच्छे फ्रेंड आपके लिए रोशनी बन सकते हैं जिसमें आप अपनी राह पर मजबूती के साथ बढ़ सकते हैं। यह कहना था माधव मुजाल्दे का। वे मानते हैं कि हमारी भीतरी दुनिया भी हरी-भरी होना चाहिए। यानी हमारे मन में उनके प्रति किसी तरह का कटुभाव या नफरत नहीं होना चाहिए।

4. दिल बड़ा रखें :
आज करियर और कॉम्पिटिशन के कारण हर कोई सिर्फ अपने बारे में सोचता है। इसी कारण हमारा दिल भी छोटा हो गया है। नवीन कहते हैं - आज प्रतिस्पर्धा के चलते ऐसा कम ही देखने में आता है कि कोई किसी दूसरे के काम की तारीफ करे जबकि ऐसा करने से खुशी देने के साथ ही अपना सकारात्मक पक्ष उजागर करते हैं। हमें अपने दिल को बड़ा रखना चाहिए। इसलिए दूसरों के कामों की तारीफ करने का मौका कभी न चूकें।

5. सहयोग की भावना :
प्रियंका बताती हैं कि किसी प्रभावशाली युवा में सहयोगात्मक रवैया होना बहुत जरूरी है क्योंकि जितनी भी बड़ी हस्तियाँ हमारे बीच मिसाल के रूप में मौजूद हैं, उन्होंने अपने स्तर पर तमाम लोगों को हमेशा सहयोग दिया है। फिर बात चाहे करियर की हो, पॉलिटिक्स की या फिर बिजनेस की। इसलिए सहयोग की भावना पैदा करें।

6. संवेदनशीलता का जल सूखने न दें :
मैनेजमेंट के छात्र बलराम कहते हैं कि व्यावसायिकता के दौर में कहीं न कहीं संवेदनहीनता के बुखार ने हम सभी को जकड़ लिया है। इसने हमारी मानवीयता को कहीं न कहीं कम करने की कोशिश की है। इसलिए हम ज्यादा स्वार्थी और कठोर हो गए हैं। इसने हमारी संवेदनशीलता के जल को सुखा दिया है। जरूरत है कि संवेदना के इस भाव को अपने अंदर बनाए रखें। पा के अमिताभ बच्चन से लेकर दलितों के राहुल गाँधी,राजकुमार हीरानी के थ्री इडियट्स सबके प्यारे इसलिए हैं कि इनकी संवेदना मरी नहीं है।

7. दूसरों को भी मोटिवेट करते रहें :
वरुण कहते हैं कि आज मोटिवेट करने के लिए तमाम मैनेजमेंट गुरुओं से लेकर रिलीजियस गुरु हैं, लेकिन यदि स्टूडेंट्स में दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता पैदा होगी तो यह उनके व्यक्तित्व को ज्यादा प्रभावकारी बना सकती है क्योंकि स्पर्धा के चलते ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है कि कोई किसी को किसी बात के लिए प्रेरित करे। सफल व्यक्ति में यह गुण जरूरी है। इस गुण को न केवल बचाए रखना होगा बल्कि इसे लगातार खाद-पानी देते हुए विकसित भी करते रहना होगा।

8. क्षमा का भाव :
हममें लोगों को माफ करने का माद्दा खत्म होता जा रहा है और कहीं न कहीं बदले की भावना घर करती जा रही है। यह हममें नफरत पैदा करती है, बदला लेने की भावना जगाती है और हम इसमें लगातार जलते हुए अपनी भीतरी दुनिया को नष्ट करने की राह पर चल पड़ते हैं। दूसरों को क्षमा करने का भाव भी आपको औरों के बीच बेहतर व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है। यह कहना था निखिल करोडि़या का। आधुनिकता के दौर में यही छोटी-सी बात युवाओं के व्यवहार में नदारद मिलती है। उन्हें लोगों को क्षमा करना सीखना होगा।

9. सहजता बरकरार रखें :
विवेक कहते हैं कि मेरे हिसाब से आज हर आदमी को अपने व्यक्तित्व में सबसे ज्यादा सहजता को बनाए रखने या अपनाने का प्रयास करना चाहिए। वास्तविक और सहज रहते हुए ही आप स्वयं को औरों से बेहतर और अलग सिद्ध कर सकते हैं। जबकि आज के परिवेश में हर दूसरा व्यक्ति वास्तविकता से दूर और असहज ही नजर आता है। इसलिए कभी भी रिअलिटी को अपनी नजरों से ओझल न होने दें। इससे आप बेहतर ढंग से कामयाबी की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

10. इस संजीवनी को बचा लें :
वैशाली कहती हैं- व्यक्तित्व विकास में आसपास का सामाजिक परिवेश भी बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है क्योंकि सकारात्मक परिवेश ही आपमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकता है। यही ऊर्जा संजीवनी का काम करती है। इसलिए हमेशा इस संजीवनी को अपनी भीतरी दुनिया में खो न जाने दें।

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