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बहुत कुछ कहती है बॉडी लैंग्वेज

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बॉडी लैंग्वेज
- गीता

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संवाद हमारी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अच्छी संवादशक्ति को हर विद्यार्थी का विशेष गुण माना जाता है। पढ़ने-लिखने या सीखने के किसी भी मौके से लेकर व्यावसायिक जीवन में भी हर जगह संवादशक्ति की जरूरत होती है। आज के समय में अच्छी संवादशक्ति के बिना सफलता मिलनी मुश्किल है।

संवादशक्ति के अंतर्गत अपके मुँह से निकले शब्द ही नहीं आते, बल्कि आपके शरीर के हाव-भाव भी आते हैं। क्योंकि आपके मुँह से निकलने वाले शब्दों की अपेक्षा आपके शरीर के हाव-भाव बहुत कुछ कहते हैं इसलिए जरूरी है कि व्यक्ति को शब्दों के साथ अपने शरीर के हाव-भाव पर भी ध्यान देना चाहिए।

तभी वह अपने संवाद को प्रभावपूर्ण बना सकता है। लोगों के मन की बात को समझने के लिए शरीर की भाषा का एक तकनीक के रूप में इस्तेमाल होता रहा है क्योंकि इसके जरिए व्यक्ति दूसरे पक्ष को आसानी से समझने का प्रयास करते हैं।

लगातार नजरें मिलाकर बात करने से संकेत मिलता है कि बोलने वाले की बात के प्रति सुनने वाला सकारात्मक रवैया अपना रहा है या नहीं।

नजरें मिला कर बात न करने वालों के बारे में यह माना जाता है कि बोलने वाले व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी है।

इसी तरह आपके हाव-भाव से अलग-अलग संकेत मिलते हैं। सुनने वाला व्यक्ति यदि अपनी गर्दन एक ओर झुका रहा है तो माना जाता है कि वह बोर हो रहा है लेकिन अगर निगाहें मिला कर कोई देर तक सुन रहा हो तो इससे संकेत मिलता है कि बात में सुनने वाले की दिलचस्पी है।

बोलने वाला यदि कोई बात छुपा रहा है तो वह अपने मुँह को बीच-बीच में उँगलियों से छुएगा।

बोलते वक्त पलकें झपकाने वाले के बारे में माना जाता है कि वह झूठ बोल रहा है।

यदि आप अपने हाथ घुटनों पर रख कर बात कर रहे हैं तो माना जाएगा कि आप किसी काम के लिए तैयार हैं।

यदि बोलते वक्त आपके हाथ आपकी कमर से नीचे हैं तो समझा जाएगा कि आप अधीर हैं। पीठ के पीछे हाथ बाँधकर बात करने से पता चलता है कि आप अपने नियंत्रण में हैं।

मानव व्यवहार को अलग-अलग संस्कृति व देश में अलग-अलग तरीके से स्वीकार किया जाता है। यह जान लेना जरूरी है कि भिन्न-भिन्न लोग शरीर की भाषा को अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल करते हैं। ऐसी स्थिति में आपको यह पता होना चाहिए कि किस स्थान पर और अलग-अलग संस्कृतियों में किन लोगों के बीच बॉडी लैंग्वेज का सही मतलब क्या होगा।

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