Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

कर्मयोगी लोकनायक थे महाराजा अग्रसेन

- महेश बंसल

Advertiesment
अग्रवाल शिरोमणि
ND
- अग्रसेन जयंती पर विशेष

व्यक्ति, समाज, राष्ट्र तथा जगत की उन्नति मूल रूप से जिन चार स्तंभों पर निर्भर होती हैं, वे हैं- आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक व सामाजिक। अग्रसेनजी का जीवन-दर्शन चारों स्तंभों को दृढ़ करके उन्नत विश्व के नवनिर्माण का आधार बनाता है, वहीं 'सर्वलोक हितं धर्मम्‌' का पथ प्रशस्त करता है।

महाराजा अग्रसेन ऐसे कर्मयोगी लोकनायक हैं जिन्होंने बाल्यकाल से ही, संघर्षों से जूझते हुए अपने आदर्श जीवन कर्म से, सकल मानव समाज को महानता का जीवन-पथ दर्शाया। अपनी आत्मशक्ति को जाग्रत कर, विश्व उपदेष्टा का महत कार्य किया।

चैतन्य आनंद की अगणित विशेषताओं से संपन्न, परम पवित्र, परिपूर्ण, परिशुद्ध, मानव की लोक कल्याणकारी आभा से युक्त महामानव अग्रसेन की महिमा से अनभिज्ञ होने के कारण उन्हें एक समाज विशेष का कुलपुरुष घोषित कर इतिहास ने हाशिए पर डाल दिया।

अग्रसेनजी सूर्यवंश में जन्मे। महाभारत के युद्ध के समय वे पन्द्रह वर्ष के थे। युद्ध हेतु सभी मित्र राजाओं को दूतों द्वारा निमंत्रण भेजे गए थे। पांडव दूत ने वृहत्सेन की महाराज पांडु से मित्रता को स्मृत कराते हुए राजा वल्लभसेन से अपनी सेना सहित युद्ध में सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया था।

महाभारत के इस युद्ध में महाराज वल्लभसेन अपने पुत्र अग्रसेन तथा सेना के साथ पांडवों के पक्ष में लड़ते हुए युद्ध के 10वें दिन भीष्म पितामह के बाणों से बिंधकर वीरगति को प्राप्त हो गए थे। युद्धोपरांत महाराजा युधिष्ठर ने भगवान कृष्ण के नेतृत्व में जो राजा व राजपुत्र शेष रहे थे, उन्हें बिदा किया। महाराजा अग्रसेन ने लोक कल्याणार्थ किए गए यज्ञ में पशु बलि देने से इंकार कर दिया। इस प्रकार क्षात्रवर्ण की आहुति देकर वैश्य वर्ण को उन्होंने अपना लिया।

(श्री अग्रभागवत के आधार पर संकलन)

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi