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एस्ट्रो से जानें कम्युनिकेशन स्किल

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- भारती पंडित
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कम्युनिकेशन स्किल व्यक्ति की पर्सनालिटी का एक खास हिस्सा है। लुक्स कितने भी अच्छे हों, यदि जबान अच्छी नहीं है तो मुँह खोलते ही सारे इम्प्रेशन पर धूल पड़ जाती है। कम्युनिकेशन स्किल अच्छी होना, कम होना, न होना ये हॉरोस्कोप पर डिपेंड करता है, फिर वातावरण के अनुसार उन्हें डेवलप करना हमारे हाथ में होता है।

हॉरोस्कोप में सेकेंड हाउस और बुध दोनों ही वाणी के कारक हैं। इनका अच्‍छी स्थिति में होना वोकली स्ट्रांग बना देता है। सेकेंड हाउस में अच्छे प्लेनेट हो या सेकंड हाउस को अच्छे प्लेनेट देखते हों तो वाणी प्रभावशाली होती है। मीठा बोलते हैं, अच्छा बोलते हैं। इसके विपरीत यदि इस हाउस पर बुरे प्लेनेट हो या देखते हों तो व्यक्ति कटु वाणी बोलता है। मरकरी वीक हो तो वाणी में ओज (ग्रेस) नहीं होता, बातों का प्रभाव नहीं पड़ता।

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इसके अलावा ज्यूपीटर का अच्छा होना भी जरूरी है। इससे नॉलेज बढ़ता है और व्यक्ति सलीके की, ज्ञान की और सही बात करता है। ज्यूपीटर कमजोर होने पर व्यक्ति फालतू व बेसिर पैर की बातें करता है। बुध यदि बहुत वीक हो तो या इस पर पाप प्रभाव ज्यादा हो तो व्यक्ति बोलते समय स्टैमर करता है (हकलाता है)। देखते हैं कुछ अन्य योग, जब व्यक्ति वोकली स्ट्रांग होता है, या जिनके होने से कम्युनिकेशन स्किल लाजवाब होती है :

* सप्तम में शनि व दशम में मून हो।
* दिन का जन्म हो और बुध सिंह राशि में हो।
* रात का जन्म हो और बुध कर्क राशि में हो।
* बृहस्पति शुभ हो।
* सेकंड हाउस का लॉर्ड बुध के साथ हो या राशि परिवर्तन करता हो या केंद्र या‍ त्रिकोण में हो।

इनमें से एक भी योग होने पर व्यक्ति वोकली स्ट्रांग होता है और उसकी बातें लोगों को प्रभावित करती हैं। ऐसे लोग मार्केटिंग फील्ड में सफल होते हैं।

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