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गर्भावस्था में जरूरी विशेष आहार

गर्भावस्था में ख्याल रखें खानपान का

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डॉ. शैफाली ओझ
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गर्भावस्था के दौरान आहार को लेकर हमारे देश में कई भ्रांतियाँ हैं। अक्सर कहा जाता है कि फलाँ चीज मत खाना, नहीं तो बच्चे का रंग काला हो जाएगा। कई समाजों में अनेक तरह के फल और सब्जियाँ गर्भवती महिलाओं के आहार में शामिल ही नहीं किए जाते हैं। अक्सर केले इसलिए नहीं खाने दिए जाते हैं कि इससे गर्भस्थ शिशु को जन्म लेने के बाद सर्दी-जुकाम बना रहेगा। मछली खाने से रोका जाता है, क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु को सफेद दाग होने की आशंका जताई जाती है।

गर्भावस्था और आहा

गर्भवती महिलाओं को संतुलित पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। उनके आहार में प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स शामिल होना चाहिए। गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में आयरन, फोलिक एसिड की एक गोली रोज लेना जरूरी है। इसकी कमी से नवजात शिशु में कटे तालू और कटे होंठों की समस्या पैदा हो जाती है। दाल, चावल, सब्जियाँ, रोटी और फलों को रोज के आहार में शामिल करें।

सुबह-शाम दूध पीना न भूलें। गर्भस्थ शिशु का शरीर जब बढ़ रहा होता है तब वह अपनी सभी जरूरतें माता के शरीर से लेकर पूरी करता है। फोलिक एसिड को फोलेट भी कहते हैं। यह कई तरह के आहार में विटामिन बी के रूप में विद्यमान होता है। चूँकि आहार से गर्भवती महिला की लौह तत्वों की आपूर्ति नहीं हो पाती, इसलिए आयरन फोलिक एसिड की गोलियाँ खाना जरूरी होता है।

क्या करें :
गर्भवती महिलाओं को गहरे हरे रंग की सब्जियाँ जरूर खाना चाहिए। दलिया या साबुत अनाज से बनी रोटियाँ भी अपने आहार में शामिल करना चाहिए। मैदे का उपयोग कम से कम करें। संतरा, अंगूर और केले को रोज की खुराक में शामिल करें। सभी तरह की दालें, बीन्स, दूध और दही रोज के आहार में होना चाहिए। सूखे मेवे विटामिन्स और खनिजों के भरपूर स्रोत होते हैं। गर्भवती महिलाओं को कॉफी, चाय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की मात्रा में कमी करना चाहिए। कोला पेय में कैफीन की मात्रा अधिक होती है।

कितनी चाहिए कैलोरी :
सामान्य महिला को जहाँ रोजाना 2100 कैलोरी चाहिए, वहीं गर्भवती महिला को 2500 कैलोरी की जरूरत होती है। स्तनपान कराने वाली महिला को 3000 कैलोरी प्रतिदिन चाहिए। 10 प्रतिशत कैलोरी प्रोटीन से तथा 35 प्रतिशत कैलोरी वसा यानी तेल, घी और मक्खन से तथा 55 प्रतिशत कैलोरी कार्बोहाइड्रेट से आना चाहिए।

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वजन की चिंता न करें :
गर्भवती महिला को वजन बढ़ने की चिंता नहीं करना चाहिए। यही वजह है कि कई स्त्री-रोग विशेषज्ञ पहली विजिट के बाद गर्भवती महिला का वजन लेना बंद कर देती हैं, क्योंकि इससे आगे के निदान पर कोई फर्क नहीं पड़ता। जाहिर है कि गर्भवती महिला का वजन उसके सामान्य वजन से अधिक ही होगा। ऐसे में चिंता की कोई जरूरत नहीं है। महिलाएँ डिलेवरी के चंद महीनों बाद नियमित कसरत और रख-रखाव से सामान्य वजन पर लौट सकती हैं।

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