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यूरोपीय टूर से उत्साहित हैं जीव

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हमें फॉलो करें भारतीय गोल्फर जीव मिल्खासिंह यूरोपीय टूर
नई दिल्ली (भाषा) , गुरुवार, 21 जून 2007 (10:59 IST)
शीर्ष भारतीय गोल्फर जीव मिल्खासिंह अगले साल दिल्ली में होने वाले यूरोपीय टूर की मेजबानी से उत्साहित है, लेकिन अभी तय नहीं है कि वह इसमें हिस्सा लेंगे या नहीं।

जीव विश्व के एशियाई यूरोपीय और पीजीए टूर में हिस्सा ले चुके हैं। उन्होंने म्यूनिख से बताया मैंने इसके आयोजन के बारे में सुना है और यह भारत में गोल्फ के लिए अच्छी खबर है।

जीव ने हालाँकि इसमें भाग लेने के बारे में तय नहीं किया है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी कुछ नहीं कह सकते। मैं इसके समय के बारे में सुनिश्चित नहीं हूँ और यह मेरे कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। लेकिन अगर यह फरवरी में होगा तो इसमें अभी काफी समय है। यह भारतीय गोल्फ के लिए अच्छा है।

अगर ऐसा होता है तो चंडीगढ का यह गोल्फर दिल्ली गोल्फ क्लब में दिखाई देगा। साल में अपने 40 हफ्ते के कार्यक्रम के बारे में उन्होंने कहा विभिन्न परिस्थितियों में एक साल में 40 हफ्ते खेलना दूसरे गोल्फरों के लिए कष्टदायी होगा लेकिन मुझे गोल्फ खेलना पसंद है, तभी तो इसके बावजूद मैंने गोल्फ खेलना चुना है। यह मेरे लिए चिंता की बात नहीं है। बल्कि यही तरीका है, जिससे मैं खुद को तैयार करता हूँ।

जीव ने कहा कुछ गोल्फर अपने खेल में सुधार के लिए कड़ा अभ्यास करते हैं, लेकिन मैं ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंट खेलने और प्रतिस्पर्धाओं में अभ्यास की कोशिश करता हूँ। जीव अमेरिकी ओपन में संयुक्त रूप से 36वें स्थान पर रहे जो उनका किसी बड़े टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ स्थान भी है।

राजीव गाँधी खेल रत्न की सिफारिश के लिए उनका नाम दिए जाने पर जीव ने कहा जो भी आप करते हों उसके लिए आपको सम्मानित किए जाने से अच्छा लगता है। वैसे मेरी सिर्फ सिफारिश की गई है मैंने इसे हासिल नहीं किया है। इसका फैसला अभी होना है कि मैं इसके योग्य हूँ या नहीं।

जीव ने कहा मुझे लगता है कि इस पुरस्कार के लिए सिफारिश किए जाने से देश में इस खेल की लोकप्रियता का पता लगता है। पिछले साल एशियाई टूर यूबीएस आर्डर आफ मेरिट चैंपियन जीव अमेरिकी ओपन में अपने प्रदर्शन से काफी खुश हैं। जीव ने 18 ओवर 298 का स्कोर बनाया और वह विजेता अर्जेंटीना के एंजेल कैब्रेरा से 13 शाट पीछे रहे।

उन्होंने कहा जहां पर मैं खेला हूँ उसके हिसाब से आकमोंट सबसे कठिन कोर्स है। यहाँ पर घसियाला मैदान ढलाउ है, लेकिन यहाँ पर मेरे धैर्य की पूरी परीक्षा हुई।

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