जन्मभूमि से मोहभंग, भय व व्यय की अधिकता, स्वयं के कारण दूसरों को कष्ट।
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इसका विशेष फल पध्य द्रेष्काण अर्थात 10 अंश से 20 अंश के मध्य मिलेगा। इसके पश्चात वक्रीय होकर इस द्रेष्काण में आएगा, तब इसका फल सामान्य ही रहेगा। जिनकी जन्म पत्रिका में गुरु की स्थिति शुभ या बलशाली है, उनके लिए शुभफल में अधिक वृद्धि तथा अशुभफल में कमी होगी। इसके विरुद्ध जिन जातकों की जन्म पत्रिका में गुरु की स्थिति अशुभ या बलहीन है, उनके शुभफल में कमी व प्रतिकूल फल में अधिकता रहेगी।
गुरु के सिंह राशि में संचरण का द्वादश राशियों पर प्रभाव इस प्रकार होता है :
मेष : सुखों में वृद्धि, संतान की अनुकूलता, श्रेष्ठजनों से संपर्क, कल्याणकारी कार्य, पूँजी में कमी संभव।
वृषभ : शत्रुओं की वृद्धि, स्वजनों से हानि, कष्ट या विवाद, मानसिक अशांति, संपत्ति के क्षेत्र में लाभकारी कार्य होंगे।
मिथुन : मित्रों से वियोग, व्यवसाय में बाधा, पीड़ा, अस्थिरता की स्थिति का निर्माण, मांगलिक कार्य के योग का निर्माण।
कर्क : धन लाभ, कुटुम्ब सुख की वृद्धि, शत्रुओं पर विजय, प्रवास से लाभ, वाणी के प्रभाव में वृद्धि।
सिंह : जन्मभूमि से मोहभंग, भय व व्यय की अधिकता, स्वयं के कारण दूसरों को कष्ट।
कन्या : संपत्ति संबंधी विवाद, मानसिक असंतोष, पीड़ा, धन का निवेश शुभ कार्यों पर, संकोच व भय से हानि।
तुला : संतान के क्षेत्र में अनुकूलता, आर्थिक स्थिति में सुदृढ़ता, वाहन सुख प्राप्ति, बुद्धि से सम्मान की प्राप्ति।
वृश्चिक : सम्मानकारी स्थिति का निर्माण, शारीरिक कष्ट या शिथिलता, राजकीय समस्या का सामना, संपत्ति में लाभ के योग।
धनु : सुखों में वृद्धि, भाग्योदय, प्रभाव में बढ़ोतरी, प्रवास के कार्य में सफलता, संपर्क से लाभ होगा।
मकर : रोग की अधिकता, यात्रा से नुकसान, संतान की प्रगति, आर्थिक हानि के योग, भाग्य पर आश्रित कार्य में प्रतिकूलता।
कुंभ : ऐश्वर्य में वृद्धि, संतान व जीवन साथी से अनुकूलता, साझेदारी के कार्य में लाभ, क्रोध की वृद्धि संभव है।
मीन : शत्रुओं के कारण कष्ट, व्यापारिक समस्या का समाधान, विवाद से हानि, यात्रा में कष्ट, मानसिक अशांति संभव।