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सुख-समृद्धि चाहिए तो षटतिला एकादशी के दिन काले तिल से करें श्री विष्णु का पूजन, जानिए 8 खास बातें

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राजश्री कासलीवाल

षटतिला एकादशी के दिन कैसे करें काले तिल से करें भगवान विष्णु का पूजन, जानिए महत्व भी
 
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार 20 जनवरी, सोमवार को षटतिला एकादशी है। इस दिन काले तिल से भगवान विष्णु की पूजा करने का अधिक मह‍त्व है। जीवन में हमें कई बार ग्रह, भूत या देव बाधा का सामना करना पड़ता है। हालांकि यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह कैसा है और उसके कर्म कैसे हैं। 
 
अगर आप भी जीवन में इस तरह की कई परेशानियों से गुजर रहे हैं तो षटतिला एकादशी के दिन काले तिल से श्री हरि नारायण तथा कृष्ण जी का पूजन करने से सभी पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव मिलने के साथ ही अन्य बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है। 
 
आइए जानें काले तिल के प्रयोग से संबंधित 8 खास बातें : - 
 
* षटतिला एकादशी के दिन पूजा के समय काले तिल के प्रयोग का विशेष महत्व होता है। इस दिन काले तिल से भगवान ​विष्णु और श्री कृष्ण की पूजा विधिपूर्वक की जाती है। 
 
* इस दिन पूजा में काली गाय का भी महत्व होता है।
 
* इस दिन उड़द और तिल मिलाकर खिचड़ी बनाएं तथा भगवान को भोग लगाकर प्रसाद में बांटना चाहिए।
 
* एकादशी को रात में श्रीहरि का भजन-कीर्तन करें। 
 
* एकादशी पूजन के बाद घड़ा, जूते, कपड़े, तिल से भरा बर्तन एवं छाता आदि का दान अवश्य करें। 
 
* इस दिन काली गाय का दान करने की भी मान्यता हैं।
 
* एकादशी के दिन 108 बार ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत्र का जाप करें। 
 
* षटतिला एकादशी के दिन तिल का उबटन, तिल मिले पानी से स्नान, तिल से हवन, खाने में तिल का प्रयोग, तिल मिले पानी को पीने तथा तिल का दान करने का विधान है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन 6 प्रकार से तिल का प्रयोग करने से मनुष्य पाप कर्मों से मुक्त होता है तथा हजारों वर्षों तक परलोक में सुख भोग को प्राप्त करता है। 

 
जो लोग व्रत नहीं कर सकते हैं उनके लिए जितना संभव हो अधिक से अधिक तिल का उपयोग करें। तिल खाएं, तिल मिला हुआ पानी पिएं। तिल का उबटन लगाकर स्नान करें और तिल का दान भी करें।
 
जाने-अनजाने हम सभी कभी न कभी पाप कर्म कर बैठते हैं। इसीलिए ऐसे पाप कर्मों के प्रभाव से मुक्ति के लिए माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी  व्रत बहुत अधिक महत्व माना गया है। अत: जो लोग किसी कारणवश व्रत नहीं कर सकते हैं, उन्हें चाहिए कि वो जितना संभव हो सके उन्हें तिल का उपयोग अवश्य करना चाहिए। 


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