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पाक्षिक पंचांग : 25 से नवतपा, 2 जून को वट सावित्री व्रत

वेबदुनिया के पाठकों के लिए पाक्षिक-पंचाग श्रंखला में प्रस्तुत है ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष का पाक्षिक पंचांग-
 
पाक्षिक-पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष 
 
संवत्सर- परिधावी 
संवत्- 2076 शक संवत् :1941
माह-ज्येष्ठ
पक्ष- कृष्ण पक्ष (19 मई से 3 जून तक)
ऋतु: ग्रीष्म
रवि: उत्तरायणे
गुरु तारा- उदित स्वरूप 
शुक्र तारा- उदित स्वरूप 
सर्वार्थ सिद्धि योग- 24 मई, 25 मई, 28 मई, 30 मई, 31 मई, 3 जून  
अमृतसिद्धि योग- 3 जून
द्विपुष्कर योग- 26 जून,   
त्रिपुष्कर योग- 5 मई
रविपुष्य योग- अनुपस्थित
गुरुपुष्य योग- अनुपस्थित 
एकादशी- 30 मई (अपरा एकादशी व्रत)
प्रदोष- 31 मई
भद्रा- 21 मई (उदय-अस्त), 25 मई (उदय-अस्त), 28 मई (उदय)- 29 मई (अस्त), 1 जून (उदय-अस्त)
पंचक: 25 मई से प्रारंभ- 30 मई को समाप्त
मूल- 19 मई से प्रारंभ- 21 मई को समाप्त एवं 29 मई से प्रारंभ- 31 मई को समाप्त 
अमावस- 3 जून (सोमवती अमावस)
ग्रहाचार: सूर्य-वृष, चंद्र-(सवा दो दिन में राशि परिवर्तन करते हैं), मंगल-मिथुन, बुध-वृष (1 जून की रात्रि से मिथुन राशि में), गुरु-वृश्चिक, शुक्र-मेष, शनि-धनु, राहु-मिथुन, केतु- धनु
व्रत/त्योहार: 22 मई- गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत (चंद्रोदय-रात्रि 10 बजकर 46 मिनट), 25 मई- नवतपा प्रारंभ, 27 मई-संत दादूदयाल जयंती, 2 जून-वट सावित्री व्रत।
 
(विशेष- उपर्युक्त गणनाओं में पंचांग भेद होने पर तिथियों/योगों में परिवर्तन संभव है।)
 
- ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया 
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र 
सम्पर्क: [email protected]
 
 

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