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इन राशि, ग्रह या भाव के लोगों से ही करें मित्रता, वर्ना पछताएंगे

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अनिरुद्ध जोशी

कई ज्योतिष विद्वान, इस तरह के मिलान को उचित नहीं मानते हैं। राशि मित्रता, ग्रह मित्रता के अलावा भाव मित्रता भी होती है। आओ हम जानते हैं कि राशि, ग्रह या भाव मैत्री क्या होती है। यदि आप अनी राशि के अनुसार मित्र, प्रेमी या पत्नीं बनाएंगे तो जीवन में लाभ मिलेगा और कभी कोई गंभीर समस्या उत्पन्न न होगी। अत: जानि मैत्री क्या होती है।

किस राशि के बीच होती है मित्रता?
राशि तत्व मैत्री :ज्योतिष के मुताबिक एक ही तत्व की राशियों में गहरी मित्रता होती है। पृथ्वी, जल तत्व और अग्नि, वायु तत्वों वाले जातकों की भी पटरी अच्छी बैठती है। अग्नि व वायु तत्व वालों की मित्रता भी होती है लेकिन पृथ्वी, अग्नि तत्व, जल तथा अग्नि तत्व एवं जल तथा वायु तत्वों वाले जातकों में शत्रुता के संबंध होते हैं।
 
* मेष, सिंह व धनु राशियां अग्नि तत्व प्रधान अर्थात ये उग्र व गर्म मिजाज वाली राशियां होती हैं। उक्त राशियों में अच्छी मित्रता होती है।
* वृष, कन्या व मकर राशियां भूमि या पृथ्वी तत्व प्रधान होने के कारण धैर्यशाली व ठंडे मिजाज वाली। उक्त राशियों में अच्छी मित्रता होती है।
* मिथुन, तुला व कुंभ राशियां वायु तत्व प्रधान होने के कारण अस्थिर चित्त व द्विस्वभाव वाली होती हैं। उक्त राशियों में अच्छी मित्रता होती है।
* कर्क, वृश्चिक व मीन राशियां जल तत्व प्रधान हैं। ये धीर-गंभीर व विशाल हृदया होती हैं। उक्त राशियों में अच्छी मित्रता होती है।
 
राशि स्वभाव मैत्री : तत्व के अलावा राशियों के स्वभाव पर भी मित्रता का असर होता है। राशियों के हिसाब से देखें तो स्वयं की राशि के अलावा मेष, सिंह व धनु राशि वालों की मित्रता मिथुन, तुला व कुंभ राशि वाले लोगों से होती है। वृष, कन्या व मकर राशि वाले लोगों की मित्रता कर्क, वृश्चिक व मीन राशि वाले लोगों से ज्यादा पटती है।
 
* मेष और वृश्चिक राशि : मेष व वृश्चिक राशि वाले लोगों की मित्रता कर्क, धनु व मीन से होती है।
* सिंह राशि : सिंह राशि वाले की मित्रता मेष, कर्क, वृश्चिक, धनु व मीन राशि वालों से होती है।
* मिथुन और कन्या राशि : मिथुन व कन्या राशि वाले लोगों की मित्रता सिंह, कर्क, धनु व मीन राशि के लोगों से होती है।
* धुन और मीन राशि : धनु व मीन राशि के लोगों की मेष, वृश्चिक, कर्क, मकर व कुंभ से मित्रता होती है।
* वृषभ और तुला : शुक्र की राशि वृष व तुला वाले लोगों की मित्रता, सिंह, धनु व मीन राशि वालों से होती है।
* मकर और कुंभ राशि : मकर व कुंभ राशि वाले लोगों की मित्रता मेष, वृश्चिक, कर्क, धनु व मीन राशि के लोगों से होती है।
*कर्क : मित्रता वृष, कन्या, वृश्चिक, मकर व मीन राशि वालों से होती है।
 
 
किन ग्रहों के बीच होती है मित्रता?
ग्रह मैत्री :
नवग्रहों में सूर्य-सिंह राशि, चंद्रमा-कर्क राशि, मंगल-मेष व वृश्चिक, बुध-मिथुन व कन्या, गुरु-धनु व मीन राशि, शुक्र-वृष व तुला तथा शनि-मकर व कुंभ राशि के स्वामी होते हैं। शास्त्रों में इनमें नैसर्गिक मैत्री संबंध बताए गए हैं।

ग्रह अधिमित्र मित्र सम शत्रु अधिशत्रु
सूर्य चंद्रमा बुध मंगल, गुरु, शुक्र,  केतु शनि राहु
चंद्र सूर्य, बुध, मंगल, शुक्र केतु शनि, गुरु राहु
मंगल चंद्रमा बुध, राहु, केतु सूर्य, गुरु, शुक्र   शनि
बुध सूर्य मंगल, शनि शुक्र, राहु, चंद्रमा केतु गुरु
गुरु   राहु, शनि सूर्य, चंद्रमा, मंगल केतु बुध, शुक्र
शुक्र शनि मंगल बुध, राहु, सूय, चंद्रमा गुरु, केतु  
शनि बुध, शुक्र, राहु गुरु, केतु मंगल, सूर्य   चंद्रमा
राहु शनि गुरु बुध, शुक्र, मंगल केतु सूर्य, चंद्रमा
केतु शनि   शुक्र, बुध गुरु, राहु, सूर्य, चंद्रमा, मंगल  
1. सूर्य : सूर्य के चंद्रमा और बुध मित्र होते हैं।
2. चंद्र : चंद्रमा के सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र मित्र होते हैं।
3. मंगल : मंगल के चंद्रमा, बुध, राहु और केतु मित्र होते हैं।
4. बुध : बुध के सूर्य, मंगल और शनि मित्र होते हैं।
5. गुरु : गुरु के राहु और शनि मित्र होते हैं।
6. शुक्र : शुक्र के शनि और मंगल मित्र होते हैं।
7. शनि : शनि के बुध, शुक्र, राहु, केतु और गुरु मित्र होते हैं।
8. राहु :  राहु के शनि और गुरु मित्र होते हैं।
9. केतु : केतु के शनि मित्र होते हैं।
 
भाव मैत्री :
* मित्रता का प्रमुख भाव एकादश भाव है जो आय भाव भी है जिसके जितने अच्छे मित्र होंगे, आय भाव उतना ही मजबूत होगा।
* इस भाव में यदि सूर्य हो तो ऐसे जातक की उच्च पदासीन, सत्तासीन व राजनीतिक लोगों से मित्रता होती है।
* चंद्रमा इस भाव में होने पर ऐसे जातक के मित्र कलाकार, वायुयान चालक, जहाज के कैप्टन, नाविक आदि मित्र होते हैं।
* एकादश भाव में मंगल है तो ऐसे जातक के मित्र खिलाड़ी, पहलवान, कुक आदि प्रकृति के लोग होते हैं।
* यदि बुध इस भाव में हो तो ऐसे जातक के मित्र व्यावसायिक वृत्ति के लोग होते हैं।
* गुरु इस भाव में होने पर जातक के मित्र बैंकिंग, वित्त धार्मिक आस्था, दार्शनिक आदि किस्म के होते हैं।
* शुक्र इस भाव में होने पर अभिनय क्षेत्र, स्त्री, कलाकार आदि मित्रों की संख्या अधिक होती है।
* शनि एकादश भाव में होने पर जातक के नौकरी पेशा, सेवावृत्ति, अपनी आयु से अधिक उम्र वाले लोगों से मैत्री संबंध होते हैं।
* यदि इस भाव में राहु या केतू हो तो ऐसे व्यक्ति के छद्म मित्रों व अपनी जाति से इतर लोगों से मित्रों की संख्या अधिक होती है।

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