Publish Date: Tue, 28 Apr 2026 (17:02 IST)
Updated Date: Tue, 28 Apr 2026 (17:10 IST)
Nrisingh Chaturdashi 2026 Ke Upay: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु ने दुष्ट दानव हिरण्यकश्यप का वध कर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। इस घटना को याद करते हुए वैशाख मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को नृसिंह चतुर्दशी और इस दिन को नृसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत, पूजा, हवन और भजन-कीर्तन करके भगवान नरसिंह की भक्ति में लीन रहते हैं। नृसिंह जयंती और चतुर्दशी का उद्देश्य भक्तों की रक्षा, शत्रुओं से मुक्ति और जीवन में समृद्धि लाना है।
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भगवान नृसिंह शक्ति, साहस और सुरक्षा के अधिष्ठाता देवता हैं। यदि आप शत्रुओं से घिरे हैं, कानूनी विवादों में फंसे हैं या अज्ञात भय आपको सताता है, तो नृसिंह जयंती यानी वैशाख शुक्ल चतुर्दशी के दिन ये 5 विशेष कार्य आपकी हर बाधा को दूर कर सकते हैं:
1. गोधूलि बेला में नृसिंह स्तोत्र का पाठ
भगवान नृसिंह का प्राकट्य संध्या काल (गोधूलि बेला) में हुआ था, इसलिए इस समय उनकी पूजा का फल अनंत गुना मिलता है। इस दिन का विशेष फल प्राप्त करने हेुत शाम के समय घी का चौमुखी दीपक जलाएं और 'ऋणमोचन नृसिंह स्तोत्र' या 'नृसिंह कवच' का पाठ करें।
लाभ: यह शत्रुओं के षड्यंत्रों को विफल करता है और आपको एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
2. दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक
भगवान विष्णु के अवतार होने के कारण नृसिंह देव को शंख अत्यंत प्रिय है। इस दिन भगवान नृसिंह की प्रतिमा या तस्वीर का केसर मिश्रित दूध और जल से अभिषेक करें। यदि दक्षिणावर्ती शंख का प्रयोग करें तो श्रेष्ठ है।
लाभ: इससे जीवन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और छिपे हुए शत्रुओं का प्रभाव कम होता है।
3. 'ठंडी' वस्तुओं का भोग लगाएं
भगवान नृसिंह का स्वरूप अत्यंत उग्र और क्रोधी माना जाता है। उन्हें शांत करने और प्रसन्न करने के लिए शीतल चीजों का अर्पण किया जाता है। इसीलिये पूजा में भगवान को सत्तू, गुड़ का शरबत, ठंडा दही, तरबूज या पंजीरी का भोग लगाएं।
लाभ: भगवान का क्रोध शांत होने से भक्तों पर उनकी सौम्य कृपा बरसती है और घर के क्लेश दूर होते हैं।
4. विशेष बीज मंत्र का जप
शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए मंत्र जप एक अचूक अस्त्र है।
कार्य: लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें:
'ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥'
5. मोर पंख और लाल फूल अर्पित करना
भगवान नृसिंह को साहस का प्रतीक माना जाता है, और उन्हें कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। नृसिंह जयंती के अवसर पर नृसिंह मंदिर जाकर भगवान को लाल रंग के फूल- जैसे गुड़हल और मोर पंख चढ़ाएं।
लाभ: लाल फूल मंगल ग्रह को भी शांत करते हैं, जिससे शत्रु आप पर हावी नहीं हो पाते और कानूनी मामलों में सफलता मिलती है।
महत्वपूर्ण सावधानी:
भगवान नृसिंह की पूजा करते समय मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष न रखें। उनकी पूजा का उद्देश्य 'अधर्म पर धर्म की विजय' और 'स्वयं की रक्षा' होना चाहिए, न कि किसी का अहित करना।
याद रखें: इस दिन व्रत रखने और अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों को जल या अन्न का दान करने से भगवान नृसिंह बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं।
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