Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 (13:05 IST)
Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 (13:14 IST)
Saur Ashadha Maas: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस राशि परिवर्तन को 'मिथुन संक्रांति' कहा जाता है। मिथुन संक्रांति के दिन से ही सौर आषाढ़ महीने की शुरुआत होती है। सौर आषाढ़ मास वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत देता है, जिससे धरती पर हरियाली बढ़ने लगती है और वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होता है। भारतीय संस्कृति में इस समय को दान, जप, तप, पूजा-पाठ और सेवा कार्यों के लिए शुभ माना गया है।
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वर्ष 2026 में सौर आषाढ़ माह की शुरुआत 16 जून 2026 से हो चुकी है, जो 16 जुलाई 2026 तक जारी रहेगा।
संक्रांति क्षण: सौर आषाढ़ का प्रारंभ हमेशा मिथुन संक्रांति से होता है।
अवधि: यह अमूमन मध्य-जून से मध्य-जुलाई के बीच आता है।
महत्व: इस समय सूर्य उत्तरायण के अंतिम चरण में होते हैं और इसके ठीक बाद (जुलाई के मध्य में) कर्क संक्रांति के साथ सूर्य दक्षिणायन हो जाते हैं।
विशेष परंपरा: धार्मिक, पर्यावरण और कृषि के दृष्टिकोण से सौर आषाढ़ का विशेष पारंपारिक महत्व है। इस समयावधि में ऋतु परिवर्तन और वर्षा का आगमन होता है। सौर आषाढ़ के शुरू होते ही भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय होने लगता है। तपती गर्मी से राहत मिलती है और धरती हरी-भरी होने लगती है।
मिथुन संक्रांति का पुण्यकाल: इस महीने के पहले दिन (मिथुन संक्रांति) पर पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है।
कृषि की नई शुरुआत: भारतीय किसानों के लिए यह महीना नई फसल (खरीफ की फसल) की बुआई का होता है। वर्षा देव और सूर्य देव की कृपा से फसलों का चक्र शुरू होता है।
रज पर्व (Raja Parba): मुख्य रूप से ओडिशा में सौर आषाढ़ की शुरुआत (मिथुन संक्रांति) को 'रज पर्व' के रूप में मनाया जाता है। यह भू-देवी (धरती माता) के सम्मान में मनाया जाने वाला नारीत्व और कृषि का उत्सव है।
चंद्र आषाढ़ और सौर आषाढ़ में अंतर
अक्सर लोग आषाढ़ महीने की तारीखों को लेकर असमंजस में रहते हैं। इसे आप इस छोटी सी तालिका से आसानी से समझ सकते हैं:
सौर आषाढ़ (Solar Ashadha)
आधार: सूर्य का मिथुन राशि में गोचर
शुरुआत: मिथुन संक्रांति से (मध्य-जून)
धार्मिक त्योहार: संक्रांति स्नान, सूर्य पूजा, कृषि उत्सव
चंद्र आषाढ़ (Lunar Ashadha)
आधार: चंद्रमा की पूर्णिमा और अमावस्या की तिथियां
शुरुआत: ज्येष्ठ पूर्णिमा के अगले दिन से (जून के अंत में)
धार्मिक त्योहार: जगन्नाथ रथ यात्रा, देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा
विशेष नोट: हिंदू धर्म के मुख्य व्रत-त्योहार- जैसे रथ यात्रा या एकादशी चंद्र आषाढ़ के आधार पर तय होते हैं, लेकिन मौसम का बदलाव, संक्रांति और सौर गणनाएं सौर आषाढ़ के अनुसार चलती हैं। इस महीने सूर्य देव के 'वरुण' स्वरूप की पूजा करने से मान-सम्मान और अच्छी सेहत की प्राप्ति होती है।
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