Publish Date: Thu, 28 Dec 2023 (11:18 IST)
Updated Date: Thu, 28 Dec 2023 (11:21 IST)
Paush Month 2023- 2024: हिंदू कैलेंडर के अनुसार 10वां माह पौष मास रहता है। हिन्दू धर्म में पौष मास का खासा महत्व माना गया है। इन दौरान ठंड का मौसम रहता है। इस माह में सूर्य धनु राशि में गोचर कर रहे होते हैं। आइए जानते हैं कि इस माह में क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
पौष माह में रखें ये सावधानियां, न करें ये कार्य:
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इस माह मांस, मंदिरा, मूली, बैंगन, उड़द दाल, मसूर दाल, फूल गोभी आदि का सेवन नहीं करें।
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शकर का सेवन कम से कम मात्रा करें।
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इस माह में तला हुआ भोजन और सूखे मेवों को खाने से बचना चाहिए।
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बुरे वचनों, क्रोध, लोभ, लालच से दूर रहे।
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यदि खरमास चल रहा हो तो शुभ मांगलिक कार्यों, जैसे शादी, विवाह तथा विवाह संबंधी चर्चा भी न करें।
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धार्मिक मान्यतानुसार पौष मास में नमक का सेवन कम से कम करना उचित होता है।
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साथ ही पौष मास में गृह प्रवेश, भूमि पूजन, हवन, मुंडन तथा जनेऊ संस्कार आदि शुभ कार्य नहीं करें।
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इस समय ठंड बहुत ज्यादा रहती है इसलिए ठंडे पानी से स्नान करने से बचना चाहिए।
पौष माह में करें ये कार्य तो होगा बहुत ही शुभ :
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हो सके तो इस माह में अधिकतर समय लाल और पीले वस्त्र ही पहनें। इससे भाग्य जागृत होगा।
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इस माह में घर में नित्य कपूर की सुगंध फैलाने स्वास्थ लाभ मिलता है।
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प्रतिदिन सूर्य मंत्र 'ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः' का जाप करते हुए सूर्यदेव का पूजन-अर्चन करें।
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प्रतिदिन स्नान करके सूर्यदेव को जल अर्घ्य अर्पित करें।
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एक तांबे के पात्र से जल लेकर उसमें रोली, लाल पुष्प, अक्षत, गुड़ डालकर आसन पर खड़े होकर 'ॐ आदित्याय नमः' मंत्र से अर्घ्य चढ़ाएं।
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सूर्य अर्घ्य के पश्चात अपनी मनोकामना कहें, भगवान सूर्य नारायण आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगे।
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पौष में तिल, गुड़, कौड़ी, झाडू, कर्पूर, लाल तथा पीले वस्त्र, चांदी से निर्मित लक्ष्मी-श्री गणेश की मूर्ति अवश्य खरीदें।
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पौष मास में मध्यरात्रि में की गई साधना अधिक लाभकारी मानी जाती है।
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इस माह में गुड़, अजवायन, लौंग और अदरक सेवन करना लाभदायी माना जाता है।
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पौष मास में अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीबों या असहाय को तिल, गुड़, गर्म वस्त्र, कम्बल आदि का दान अवश्य करें।
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प्रतिदिन अपने माता-पिता अथवा घर के बुजुर्गों के चरण स्पर्श करें।
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पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पौष मास में पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, नदी स्नान व अर्घ्य तथा दान-पुण्य के कार्य अवश्य करें।
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पौष रविवार के दिन उपवास रखें, नमक ना लें।
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