Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

सिंधारा दोज : 10 बातों से जानिए पूजा की सरल विधि

हमें फॉलो करें webdunia
sindhara dooj 2021
 
मंगलवार, 10 अगस्त 2021 को श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, इस दिन सिंजारा दोज या सिंधारा दूज पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन श्रावण मास का तीसरा मंगला गौरी व्रत भी है। 
 
शास्त्रों के अनुसार श्रावण माह की प्रतिपदा के दूसरे दिन द्वितीया पर सिंधारा दौज या सिंधारा दूज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व खासकर उत्तर भारतीय महिलाओं का पर्व है। दक्षिण भारत में, खासकर तमिलनाडु और केरल में, महेश्वरी सप्तमत्रिका पूजा सिंधारा दूज के दिन की जाती है। इस दिन वे उपवास रखकर अपने पतियों की लंबी उम्र की प्रार्थना करती हैं। सिधारा पर्व खासकर पंजाबी, हरियाणवी और राजस्थानी महिलाएं मनाती हैं। जानिए पूजा की सरल विधि- 
 
1. इस दिन सुहागन महिलाएं उपवास रखती हैं और अपने पति की दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। महिलाओं द्वारा सिंधारा दूज को बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन सभी सुहागन महिलाएं और कुंआरी कन्याएं भी श्रृंगार करके व्रत रखती हैं। सिंधारा दूज मुख्य रूप से यह बहुओं का त्योहार है। इस दिन सास अपनी बहुओं को भव्य उपहार प्रस्तुत करती हैं, जो अपने माता-पिता के घर में इन उपहारों के साथ आते हैं। सिंधारा दूज के दिन, बहूएं अपने माता-पिता द्वारा दिए गए 'बाया' लेकर अपने ससुराल वापस आ जाती हैं। 'बाया' में फल, व्यंजन और मिठाई और धन शामिल होता है।  
 
2. सिंधारा दूज को सौभाग्य दूज, गौरी द्वितिया या स्थान्य वृद्धि के रूप में भी जाना जाता है। 
 
3. इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की भी पूजा की जाती है। शाम में, देवी को मिठाई और फूल अर्पण कर श्रद्धा के साथ गौरी पूजा की जाती है।
 
4. द्वितीया को छोटा बैंगन व कटहल खाना निषेध है।
 
5. इस दिन व्रतधारी महिलाएं पारंपरिक पोशाक भी पहनती हैं। हाथों में मेहंदी लगाती हैं और आभूषण पहनती हैं। 
 
6. चूडि़यां इस उत्सव का का खास अंग है। वास्तव में, नई चूडि़यां खरीदना और अन्य महिलाओं को चूडि़यां का उपहार देना भी इस उत्सव की एक दिलचस्प परंपरा एक हिस्सा है। 
 
7. इस दिन सुहागन महिलाओं एक-दूसरे के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करने का रिवाज हैं। 
 
8. सिंधारा दूज के दिन ही झूले भी पड़ते हैं। महिलाएं झूले झूलते हुए गाने गाती हैं।
 
9. शाम को गौर माता या देवी पार्वती की पूजा करने के बाद, वह अपनी सास को यह 'बाया' भेंट करती हैं। सिंधारा दूज के दिन लड़कियां अपने मायके जाती हैं और इस दिन बेटियां मायके से ससुराल भी आती हैं। मायके से बाया लेकर बेटियां ससुराल आती हैं। तीज के दिन शाम को देवी पार्वती की पूजा करने के बाद 'बाया' को सास को दे दिया जाता है। 
 
10. द्वितीया तिथि को सुमंगल कहा जाता है जिसके देवता ब्रह्मा है। यह तिथि भद्रा संज्ञक तिथि है। भाद्रपद में यह शून्य संज्ञक होती है। सोमवार और शुक्रवार को मृत्युदा होती है। बुधवार के दिन दोनों पक्षों की द्वितीया में विशेष सामर्थ आ जाती है और यह सिद्धिदा हो जाती है, इसमें किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। 
 
अगले दिन यानी 11 अगस्त 2021, बुधवार को महिलाओं का खास पर्व हरियाली तीज रहेगी। 

ALSO READ: हरियाली तीज के शुभ और श्रेष्ठ मुहूर्त, जानिए कैसे मनाएं शुभ पर्व


Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

श्रावण माह में इस तरह के व्रत रखना वर्जित है?