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यात्रा पर जाने से पहले, जरूर करें यह 6 काम

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आखिर कौन नहीं चाहता कि वह जिस काम के लिए घर से निकले, उसमें सफल न हो। अगर अपना कार्य सफल करना चाहते हैं, तो घर से निकलने के पूर्व कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें, यही बातें आपको सफलता दिलाने में सहायक होंगी।
 
लोक परंपराओं और शास्त्रों की कुछ ऐसी उक्तियां हैं जिनके आधार पर हम और आप घर बैठे ही यह जान सकते हैं कि हमें कब और किस समय यात्रा करनी चाहिए। शुभ शकुन ही आपको यह संकेत देते हैं कि आपकी यात्रा पूरी तरह सफल होगी। आंशिक रूप से सफल होगी या मकसद पूरा नहीं होगा।

काम की 10 बातें, जो रखें जीवन सुरक्षित, जानिए


1 यात्रा से पूर्व स्वर को पहचानें - यदि बहुत जल्दबाजी में यात्रा करना है तो ऐसी स्थिति में सबसे अच्‍छा है चौघड़िया या दुघड़िया मुहूर्त निकालकर उसके अनुसार यात्रा करें।
 
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2 चौघड़ि‍या जानें - चौघड़िया तथा दुघड़िया दोनों में बहुत ही सामान्य से नियम को माना जाता है- जैसे, जो सांस चल रही हो, वही पैर यात्रा के लिए आगे बढ़ाना चाहिए। इसके बारे में गांवों में एक कहावत काफी प्रचलित है - जेहि सुर चले वही पग दीजै, काहे को पोथी-पत्रा लीजै।। अर्थात- जो स्वर चल रहा हो, उसी के अनुसार कदम आगे बढ़ाकर यात्रा पर जाना चाहिए।

3 यात्रा से पूर्व योगिनी विचार - यात्रा के दौरान योगिनी वास का भी विचार किया जाना चाहिए। योगिनी का अलग-अलग तिथियों को भिन्न-भिन्न दिशाओं में वास होता है। योगिनी का वास परिबा को पूर्व दिशा में, दूज को उत्तर में, तीज को आग्नेय कोण में, पंचमी को दक्षिण, षष्ठी को पश्चिम, सप्तमी को ईशान में होता है। फिर नवमी से योगिनी का सिलसिला इसी प्रकार दोहराया जाता है।

4 समयशूल व दिशाशूल - उषाकाल में पूरब को, गोधू‍लि में पश्चिम को, अर्धरात्रि में उत्तर को और मध्याह्नकाल में दक्षिण को नहीं जाना चाहिए। वहीं राशि के अनुसार कुंभ और मीन के चन्द्रमा में अर्थात पंचक में दक्षिण कदापि न जाएं। मेष, सिंह और धनु राशि का चंद्रमा पूर्व में, वृष, कन्या और मकर राशि का दक्षिण में, मिथुन, तुला और कुम्भ का पश्चिम में, कर्क, वृश्चिक, मीन का चन्द्रमा उत्तर में रहता है। यात्रा में चन्द्रमा सम्मुख या दाहिने शुभ होता है। पीछे होने से मरणतुल्य कष्टऔर बाईं ओर होने से धनहानि होती है।
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5 त्याज्य वस्तुएं - किसी विशेष कारण या फल की प्राप्ति के लिए परदेस या अन्यत्र शहर की यात्रा पर जा रहे हैं, तो यात्रा के तीन दिन पहले दूध, पांच दिन पहले हजामत, तीन पहले तेल, सात दिन पहले मैथुन त्याग देना चाहिए। यदि इतना न हो सके तो कम से कम एक दिन पहले तो ऊपर की सब त्याज्य वस्तुओं को अवश्य ही छोड़ देना चाहिए।

6 शकुन विचार - यह है यात्रा के शकुन विचार- यात्रा के दौरान कुछ चीजों का देखना शुभ माना जाता है। पुष्प, सौभाग्यवती नारी, दर्पण, धनुष, पक्षी, मछली, गोबर, बछड़े के साथ गाय, माथे पर तिलक लगाए हुए ब्राह्मण, चिड़िया, जल भरा घड़ा या कोई दूसरा बर्तन, फल, दही, धुआंरहित जलती आग, वेश्या, धोबी, शराब, पान, दूध, घी, शहद, हाथी-घोड़ा, ध्वज, कन्या, राजा, कुश, हंस, मोर, खुश रहने वाली कोई बात, बकरी, मित्र और वाद्य का दर्शन शुभ माना गया है। 


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