कोरोना वायरस ने भारत के इस गांव को पूरी तरह ठप किया

रविवार, 16 फ़रवरी 2020 (08:36 IST)
अमिताभ भट्टासाली, बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
पश्चिम बंगाल में पूर्वी मिदनापुर ज़िले का भगबानपुर गांव चीन के वुहान शहर से ठीक 2,799 किलोमीटर दूर है। वुहान वही जगह है जहां से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलना शुरू हुआ। वुहान से इतनी दूर होने के बावजूद भगबानपुर कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित है। इस इलाक़े में रहने वाली पुतुल बेरा और रीता मेती जैसे सैकड़ों लोग कोरोना वायरस के कारण संकट में हैं।
 
ये लोग इंसानी बालों से विग बनाने का काम करते हैं। ये महीने में क़रीब 50 टन का उत्पादन करते थे, जिसे चीन निर्यात किया जाता था लेकिन पिछले दो सप्ताह से यह सिलसिला थम गया है।
 
इस कारोबार से घर चलाने वाली रीता मेती बताती हैं, "हमें नहीं पता था कि किसी वायरस का अटैक हो जाएगा। हमने हज़ारों रुपए के बाल ख़रीद लिए थे।"
 
रीता की पड़ोसन पुतुल बेरा और उनके पति 40 हज़ार रुपये की कीमत के इंसानी बालों के साथ फंस गए हैं। उन्हें बड़े व्यापारियों और निर्यातकों से अपना हज़ारों रुपये का भुगतान मिलने का इंतज़ार है। पुतुल बताती हैं, "वो लोग चीन में सामान नहीं बेच पा रहे हैं। इसलिए हम भी बकाया पैसे नहीं चुका पा रहे हैं।"
 
इस इलाक़े के सैकड़ों एजेंटों ने इंसानी बाल इकट्ठे किए हैं। बालों में कंघी करते समय जो बाल कंघी में फंसे रह जाते हैं, उन्हें छोटे-छोटे गुच्छों में इन एजेंटों को बेच दिया जाता है। पंजाब और कश्मीर के पुरुषों और महिलाओं के बाल लंबाई की वजह से सबसे अच्छे माने जाते हैं और कीमती होते हैं।
 
भगबानपुर, चंडीपुर और इसके आसपास के इलाक़ों में ट्रकों, ट्रेनों और यहां तक कि एयर कार्गो से भी बोरों में भरकर इंसानी बाल आते हैं।
 
बालों के इन गुच्छों को सुलझाकर धोया जाता है। फिर सुखाकर छह से 26 इंच तक के अलग-अलग आकार में काटा जाता है और फिर इनके बंडल बनाकर चीन निर्यात कर दिया जाता है। बालों का यह काम फ़ैक्ट्रियों से लेकर घरों तक में किया जाता है। लेकिन अभी ये सारा काम थम गया है।
 
बालों के एक बड़े निर्यातक शेख़ हसीफ़ुर रहमान बताते हैं, "कोरोना वायरस की वजह से चीन के साथ मेरे सारे व्यापारिक कामकाज ठप हो गए हैं। चीनी ख़रीदार यहां आने में असमर्थ हैं और हम भी तैयार हो चुके उत्पाद निर्यात नहीं कर सकते। यहां के 80 फ़ीसदी से ज़्यादा लोग बेरोज़गार हो गए हैं।"
 
इनके कारख़ाने का हॉल अब खाली पड़ा है, जहां कुछ सप्ताह पहले तक रोज़ाना क़रीब 25-30 लोग काम करते थे। यहां पूरे साल चीनी ख़रीदारों का आना-जाना लगा रहता है। ये सभी चीनी नव वर्ष मनाने के लिए वापस गए और अभी तक इनमें से कोई भी नहीं लौटा है।
 
बालों के एक छोटे व्यापारी गणेश पटनायक पुतुल और रीता जैसी घर चलाने वाली तमाम महिलाओं को इंसानी बाल मुहैया कराते हैं।
 
उन्होंने बताया, "मुझे दो सप्ताह से कोई भुगतान नहीं मिला है। मुझे इस महीने की 20 तारीख़ तक बकाया पैसा चुकाने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन मुझे कोई ख़ास भरोसा नहीं है। अगर बालों का यह व्यापार पूरी तरह ठप हो जाता है तो मुझे नहीं पता कि मैं और क्या करूंगा।"
 
बालों का व्यापार इस इलाक़े की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। इसके अचानक बंद होने का असर दूसरों पर भी पड़ रहा है।
 
शेख़ सिकंदर भगबानपुर बस स्टैंड पर तम्बाकू बेचते हैं। वो बताते हैं, "मेरी छोटी सी दुकान है फिर भी मुझ पर कोरोना वायरस का असर पड़ रहा है। मेरे व्यापार में भी गिरावट आई है। अगर बालों का व्यापार प्रभावित होता है तो बाकी सभी दुकानों पर भी इसका असर पड़ता है।"
 
प्रज्ज्वल मेती और बेहतर तरीक़े से बताते हैं कि कैसे कोरोना वायरस अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है। मेती एक राष्ट्रीय बैंक के एजेंट हैं, जो बैंक के काउंटर की तरह लोगों से पैसा जमा करते हैं और उन्हें भुगतान देते हैं।
 
वो बताते हैं, "पहले सिर्फ़ मेरे काउंटर से ही रोज़ाना क़रीब 10 लाख रुपये का लेनदेन होता था लेकिन कोरोना वायरस के बाद से इसमें तेज़ी से (क़रीब 90 फ़ीसदी) की गिरावट आई है।"
 
एक स्थानीय डॉक्टर अनुपम सरकार कहते हैं कि इस इलाक़े में आर्थिक हालत इतनी ख़राब हो गई है कि लोग डॉक्टर की फ़ीस भी नहीं चुका पा रहे हैं।
 
लोग परेशान हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि हालात जल्द ही ठीक हो जाएंगे। बुज़ुर्ग रेणुका मेती बालों के छोटे-छोटे बंडलों में इसी उम्मीद के साथ कंघी कर रही हैं कि जल्द ही व्यापार फिर से शुरू हो जाएगा।

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