Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

कोरोना: पंजाब में कुछ ऐसी अफ़वाह फैली कि लोग टेस्ट कराने से डर रहे हैं

webdunia

BBC Hindi

गुरुवार, 10 सितम्बर 2020 (07:44 IST)
अरविंद छाबड़ा, बीबीसी संवाददाता
भारत में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन इसके साथ कई तरह की अफ़वाहें भी फैल रही हैं जिसका असर टेस्टिंग पर पड़ रहा है। कोरोना वायरस के फैलने से जुड़ी अफ़वाहों के कारण, पंजाब में लोग कोरोना का टेस्ट करवाने से डर रहे हैं।
 
पंजाब के संगरूर ज़िले की रहने वालीं सोनिया कौर कहती हैं, "इंसानी अंगों की तस्करी की जा रही है। सिर्फ़ गांव के लोग ही नहीं पूरी दुनिया इससे डरी हुई है। सोशल मीडिया ऐसी ख़बरों से भरा पड़ा है।"
 
कौर के मुताबिक़ जाँच और इलाज करने के बहाने लोगों के अंग निकाले जा रहे हैं। ऐसी बातें पंजाब के ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले कई लोग कह रहे हैं।
 
पंजाब में यह अफ़वाह तेज़ी से फैल रही है कि वायरस बस एक बहाना है, जिन लोगों को कोई बीमारी नहीं है, कोविड-19 के सहारे उन्हें मारा जा रहा, उनके अंग निकाल लिए जा रहे हैं और लाशों की अदला-बदली हो रही है।
 
स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले
लोगों के मन में डर बसा हुआ है और इंटरनेट की पहुँच और सोशल मीडिया ख़ासकर व्हॉट्सऐप पर लोगों की मौजूदगी इन अफ़वाहों को तेज़ी से फैलाने में मदद कर रही है। इसके कारण कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले किए गए।
 
कई दूसरे गांवों की तरह सोनिया के गांव में सैंपल इकट्ठा करने आए स्वास्थ्यकर्मियों को घुसने नहीं दिया गया, लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर ईंट पत्थरों से हमला भी किया और "वापस जाओ, हमें टेस्ट नहीं चाहिए" के नारे लगाकर उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर कर दिया।
 
सरकार अपनी तरफ़ से जागरूकता फैलाने और डर कम करने के लिए कई वीडियो लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है, इन वीडियो को ध्यान में रखकर भी एक कैंपेन चलाने की तैयारी की जा रही है।
 
सरकार की कोशिशों पर बुरा असर
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बीबीसी को बताया, "ये सभी अफ़वाह हैं, कोविड के कारण मरने वालों को कोई छू भी नहीं सकता है। लाश को बांध कर अंतिम क्रिया के लिए भेज दिया जाता है। अंगों के निकाले जाने का तो सवाल ही नहीं उठता।"
 
पंजाब में कोविड -19 को लेकर अफ़वाहों का फैलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन टेस्टिंग को लेकर हो रहे विरोध की घटनाएं पिछले कुछ समय में काफ़ी फैल गई हैं। इसके कारण बीमारी से निपटने के लिए की जा रही सरकार की कोशिशों पर असर पड़ रहा है।
 
पंजाब में पिछले कुछ हफ्तों में मामले लगातार बढ़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौतों के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह टेस्टिंग में होने वाली देरी है। बीमार पड़ने के बाद लोग काफ़ी देर से अस्पताल पहुँच रहे हैं।
 
कोविड-19 से संबंधित सूचनाएं
साठ साल के सुच्चा सिंह की पत्नी कुलवंत कौर की मौत कोविड-19 से हो गई है। लेकिन, उन्हें अभी भी लगता है कि कोरोना वायरस एक साज़िश है।
 
वे कहते हैं, "यह सब बकवास है। कोरोना जैसा कुछ भी नहीं है। अगर ऐसा कुछ होता तो मेरी पत्नी की मां जो कि उम्र के 80 के दशक में हैं वो ज़िंदा नहीं होतीं।"
 
वे कहते हैं कि उन्हें पछतावा है कि वे अपनी पत्नी को डायबिटीज चेक कराने के लिए अस्पताल क्यों लेकर गए। सुच्चा सिंह कहते हैं, "उन्होंने उनका डायबिटीज का इलाज ही नहीं किया बल्कि कोरोना, कोरोना चिल्लाते रहे।"
 
"हमने सुना है कि डॉक्टरों और सरकारों को कोविड-19 की ज्यादा मौतें दिखाने के लिए पैसे मिल रहे हैं। हमने यह भी सुना है कि लोगों को घरों से निकाला जा रहा है और फिर उन्हें मार दिया जाता है।"
 
कोविड-19 से संबंधित सूचनाओं में बदलाव और इसके अलग-अलग असर के चलते ग़लत सूचनाओं को हवा मिलती दिख रही है।
 
शवों की अदला-बदली के मामले
एक गांव प्रधान सतपाल सिंह ढिल्लों कहते हैं, "पहले बूढ़े लोग मर रहे थे। अब युवा लोग भी मर रहे हैं। ऐसा कैसे हो सकता है कि अचानक से युवा लोग संक्रमित होने लगे हैं।"
 
सतपाल के गांव की पंचायत ने कोविड-19 के लिए टेस्टिंग की इजाज़त नहीं दी थी।
 
"हम आमतौर पर देखते हैं कि मौत किसी बूढ़े शख्स की हुई, लेकिन परिवार को किसी युवा महिला का शव सुपुर्द किया गया। ऐसे में लोग कैसे किसी पर भरोसा कर पाएंगे?"
 
इस तरह की अफ़वाहों की जड़ तक पहुँचना नामुमकिन है, लेकिन शवों की अदला-बदली जैसे मामले किसी ग़लती की वजह से हुए हो सकते हैं।
 
जुलाई में दो भाइयों ने, जिनके पिता की कोविड-19 से मौत हो गई थी, आरोप लगाया कि वे ज़िंदा हैं और उन्हें एक महिला का शव दिया गया है।
 
अफ़वाहों का लगातार मज़बूत होना....
इसकी वजह से एक मजिस्ट्रेट की अगुवाई में जाँच की गई और अधिकारियों ने बाद में माना कि इसमें घालमेल हो गया था, लेकिन उन्होंने कहा कि उन भाइयों के पिता की भी मौत हो गई थी और उनका अंतिम संस्कार महिला के परिवारवालों ने कर दिया था। इस सबके बावजूद अफ़वाहें लगातार मज़बूत ही हो रही हैं।
 
मोगा ज़िले के सुखदेव सिंह कोकरी कहते हैं, "हम टेस्टिंग का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन हम निश्चित तौर पर लोगों को स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा ज़बरदस्ती ले जाए जाने का विरोध कर रहे हैं। जब लोगों को ले जाया जाता है तब वे सामान्य होते हैं, लेकिन वे मरे हुए लौटते हैं और उनके अंग निकाल लिए गए होते हैं।"
 
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोविड-19 के आंकड़ों को बढ़ाचढ़ाकर बता रही है ताकि लोगों को कंट्रोल में रखा जा सके और विरोध-प्रदर्शन न हों।
 
वैक्सीनेशन मुहिम के दौरान
अधिकारियों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि कोई क्यों इन अफ़वाहों का सहारा लेगा या पंजाब में इस पैमाने पर ऐसा क्यों हो रहा है।
 
राज्य के स्वास्थ्य विभाग के उप निदेशक अरविंदर गिल कहते हैं कि पोलियो और रूबेला वैक्सीनेशन मुहिम के दौरान भी इसी तरह की अफ़वाहें फैली थीं।
 
"मुझे याद है कि हमारी पोलियो वैक्सीनेशन ड्राइव के दौरान लोगों ने हमारी टीमों का विरोध किया और कहा कि इससे बुख़ार होता है और यह घातक साबित हो सकता है।"
 
डॉ. गिल ने कहा कि यह विरोध काफ़ी ख़तरनाक साबित हो सकता है क्योंकि लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि वे संक्रमित हो रहे हैं।
 
"वे संक्रमित होंगे और इधर-उधर घूमेंगे। उनकी ख़ुद की हालत भी ख़राब होगी। बाद में उन्हें हॉस्पिटल लाया जाएगा, तब स्वास्थ्यकर्मी शायद उनकी मदद न कर पाएं।"

Share this Story:

वेबदुनिया पर पढ़ें

समाचार बॉलीवुड लाइफ स्‍टाइल ज्योतिष महाभारत के किस्से रामायण की कहानियां धर्म-संसार रोचक और रोमांचक

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

अलेक्सी नावाल्नी कैसे बन गए मर्केल और पुतिन के बीच तनाव का कारण