Bbc Hindi News %e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%80 %e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%a6 %e0%a4%b9%e0%a5%8b %e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%80 %e0%a4%b9%e0%a5%88 %e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%95 109070500108_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

अपनी मदद हो सकती है खतरनाक

Advertiesment
आत्मविश्वास
एक नए शोध में कहा गया है कि आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आजमाए जाने वाले उपाय उल्टा प्रभाव डाल सकते हैं और घातक भी सिद्ध हो सकते हैं।

BBC
कनाडा के शोधकर्ताओं का मानना है कि जिन लोगों का आत्मविश्वास किन्हीं कारणों से कम हो जाता है और वो अगर बार बार अपने बारे में सकारात्मक बयान देते हैं तो इससे उन पर बुरा असर ही पड़ता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार सकारात्मक टिप्पणियाँ उन्हीं लोगों को फायदा पहुँचाती है जिनका आत्मविश्वास ऊँचा रहता है।

साइकोलॉजिकल साइंस में छपे इस शोध के अनुसार जिन लोगों का आत्मविश्वास कम होता है और वो बार-बार अपने बारे में अच्छी बातें करते हैं तो इससे उनको नुकसान होता है क्योंकि वो बार-बार सकारात्मक बयान देकर सच्चाई से मुँह छिपा रहे होते हैं।

'अपनी मदद स्वयं करें' की विचारधारा सैमुअल स्माईल्स ने शुरू की थी और उनका कहना था कि लोग अपने बारे में अच्छा सोचकर और बोलकर अपनी मदद खुद कर सकते हैं।

आने वाले दिनों में इस विषय पर किताबें छपीं जिसकी लाखों प्रतियाँ बिक गईं। अब यह विचारधारा पूरा का पूरा उद्योग बन चुकी है।

यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू और यूनिवर्सिटी और न्यू ब्रन्सविक के शोधकर्ताओं ने लोगों से ऊँचे आत्मविश्वास और कम आत्मविश्वास वाले लोगों से यह पंक्ति दोहराने को कहा कि 'वो प्यार करने योग्य हैं'। यह किसी की पर्सनॉलिटी के बारे में सकारात्मक टिप्पणी है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का आत्मविश्वास पहले से ही ऊँचा था उन्हें इस पंक्ति को दोहराने से थोड़ा-सा फायदा हुआ।

इसके बाद सभी लोगों को अपने सकारात्मक और नकारात्मक विचारों की सूची बनाने को कहा। इसमें पाया गया कि कम आत्मविश्वास वाले लोग तब अच्छे मूड में देखे गए जब वो नकारात्मक चीजों के बारे में सोचते रहे।

शोधकर्ताओं का कहना है कि कम आत्मविश्वास वाले लोग जब अपने सकारात्मक बयान देते हैं तो उससे उनके व्यक्तित्व में विरोधाभास पैदा होता है, जो उनके लिए नुकसानदेह है।

शोध के प्रमुख जॉन वुड का कहना था कि बार-बार सकारात्मक बयान दोहराने से उन लोगों को अधिक नुकसान होता है जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत होती है।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi