भारत सरकार की महत्वाकांक्षी 'आधार' योजना के तहत एक साल में दस करोड़ लोगों के नामांकन का दावा किया गया है हालांकि उनमें से कई को अब भी इस योजना के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। हर भारतीय को एक विशिष्ट पहचान देने के मकसद से चलाए गए ‘आधार’ कार्यक्रम को शुरू हुए गुरुवार को एक साल पूरा हो गया।
ये योजना लागू कर रहे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानि ‘यूआईडीएआई’ के अध्यक्ष नंदन निलेकनी का कहना था कि इस महत्त्वाकांक्षी योजना का मकसद उन लोगों को पहचान प्रदान करना होगा, जिनके पास ये साबित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है।
जिन दस करोड़ लोगों के नामांकन का दावा किया गया है उनमें से चंद लोगों से जब पूछा गया कि उन्हें इस योजना के बारे में जानकारी है या नहीं, तो जवाब कुछ यूं मिले। 'मेरे ख्याल से इस कार्ड के होने से मेरे बैंक खाते में मुझे हजार रुपए प्रति महीना मिलेंगे। बाकी राशन पानी का पता नहीं।'
एक अन्य व्यक्ति ने बताया, 'मेरा आधार कार्ड तो बन गया है, लेकिन उसके फायदों के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। चूंकि ये कार्ड सरकार बनवा रही है, तो हमें बनवाना ही पड़ा।' 'हमें ये बताया गया था कि जिस तरह जन्मपत्री होती है, उसी तरह का ये भी एक पहचान पत्र होगा। इस कार्ड के होने से किसी की मजाल नहीं होगी हमें दिल्ली से हिलाने की। जो सरकार कर रही है, वो तो सही ही होगा।'
दिल्ली की एक ग़रीब बस्ती में रहने वाले इन लोगों की बातें सुन कर ये नहीं कहा जा सकता कि इन्हें इस मुहिम के कथित फायदों में बारे में जरा भी जानकारी है। जबकि नंदन निलेकनी ने आधार को ‘आम आदमी का अधिकार’ की संज्ञा दी है।
साथ ही उन्होंने एक दूरदर्शी भाव से कहा था कि यूआईडी यानि विशिष्ट पहचान पत्र बनने से लोगों को मिलने वाले सरकारी फायदों की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। दरअसल आधार योजना के तहत हर भारतीय को 12 अंकों के रूप में एक विशिष्ट पहचान दी जा रही है।
यूआईएडीआई के मुताबिक साल 2014 तक 60 करोड़ जनता को पहचान पत्र देना उनका लक्ष्य है और अगले साल मार्च 2012 तक वे 20 करोड़ लोगों को ये पहचान पत्र मुहैया करवाएंगे।
एक साल के भीतर इस योजना के तहत नामांकित किए गए 10 करोड़ लोगों में से लगभग पौने चार करोड़ लोगों का ‘आधार’ पहचान नंबर तैयार हो चुका है। इस साल अक्तूबर महीने की शुरुआत से एक दिन में 10 लाख लोगों का आधार नामांकन दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
चुनौतियां : 'यूआईडीएआई' के अध्यक्ष नंदन निलेकनी ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता में कहा कि भारत सरकार ने बैंक खाता खोलने और मोबाइल फोन कनेक्शन प्राप्त करने हेतु आधार को पहचान-प्रमाण और पते के प्रमाण के रुप में मान्यता दी है।
इसके अलावा एलपीजी कनेक्शन हेतु भी आधार को वैध पहचान और पते के प्रमाण के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। लेकिन जमीनी स्थिति ये है कि जिन लोगों के लिए ये योजना मुख्य रूप से लाई गई है उस आम जनता को इन सब फ़ायदों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
जब 'यूआईडीएआई' के प्रबंध निदेशक आरएस शर्मा से पूछा गया कि आम आदमी के फायदे के लिए बताई जा रही इस योजना के बारे में लोगों के बीच इतनी कम जानकारी क्यों है, तो उनका कहना था, 'हमारा प्रयास ये ही रहता है कि लोगों को आधार के फायदों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी मिले। लेकिन जाहिर है कि हर योजना में कहीं न कहीं सुधार की गुंजाइश रहती है। मैं ये नहीं कह रहा कि हमारा सिस्टम पूरी तरह से प्रभावशाली है, लेकिन हम प्रयास कर रहे हैं कि हर भारतीय को ये पता चल सके कि इसके क्या फायदे हैं।'
लोगों के बीच कम जानकारी के अलावा आधार कार्ड को लोगों तक समय पर पहुंचाना भी 'यूआईडीएआई' के लिए एक चुनौती साबित हो रहा है। साथ ही यूआईडी नंबर उपलब्ध कराने के लिए चलाया जा रहा कार्यक्रम अपने निर्धारित लक्ष्य से पीछे चल रहा है।
पांव पसारता 'आधार' : भारत सरकार ने 'यूआईडीएआई' का अधिकार क्षेत्र बढ़ाकर अध्यक्ष नंदन निलेकनी से कहा है कि वो सुझाव दे कि सरकारी योजनाओं के तहत आम आदमी को दी जाने वाली सब्सिडी को ‘आधार’ के जरिए लोगों तक सीधे तौर पर किस तरह पहुंचाया जाए।
गौरतलब है कि यूआईडी को कानूनी मान्यता देने की प्रक्रिया अभी जारी है और इससे जुड़ा विधेयक स्थाई समिति में लंबित है। नंदन निलेकनी का कहना है कि यूआईडी विधेयक का मसौदा तैयार है और संसद के शीतकालीन सत्र में इसके पारित होने की उम्मीद है।
मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक योजना आयोग ने 'यूआईडीएआई' के विस्तृत अधिकार क्षेत्रों पर चिंता जताई थी और सरकार से दरख्वास्त की थी कि वो प्राधिकरण के ढांचे पर दोबारा नजर डाले।
इस पर प्रतिक्रिया करते हुए 'यूआईडीएआई' के अध्यक्ष नंदन निलेकनी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके अधिकारों को मान्यता दी है और उनका प्राधिकरण योजना आयोग से जुड़ा हुआ है।