अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी ने 1961 में ये घोषणा कर दुनिया को रोमांच से भर दिया था कि 60 का दशक समाप्त होने से पहले अमेरिका चाँद पर अंतरिक्ष यात्री भेजकर उन्हें सुरक्षित धरती पर लाने के सपने को संभव बनाएगा।
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अमेरिका चाँद पर पहुँच जाएगा इसे लेकर शायद किसी को संदेह नहीं था, लेकिन इतने कम समय में इस सपने को पूरा किया जा सकेगा, इस पर कम ही लोगों को भरोसा था।
अंतत: जुलाई 1969 में अपोलो 11 मिशन के जरिये अमेरिका चाँद पर मानव को पहुँचाने में सफल रहा। इस तरह अमेरिका ने केनेडी के सपने को निर्धारित समय के भीतर ही पूरा कर दिखाया। उल्लेखनीय बात ये भी रही कि पूरा काम निर्धारित बजट के भीतर ही हो गया।
चंद्र अभियान के बारे में केनेडी के बाद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी एक सपना देखा। उन्होंने 2004 में घोषणा की कि 2020 तक अमेरिका चाँद पर दोबारा जाएगा। वहाँ जाकर लौटने के लिए नहीं, बल्कि सौर मंडल में और आगे जाने के लिए चाँद पर अड्डा बनाने के वास्ते, लेकिन जिस तरह केनेडी के सपने को नासा ने साकार कर दिखाया, क्या बुश के सपने को भी समय रहते पूरा करना संभव है?
एल्ड्रिन को संदेह : नील आर्मस्ट्राँग के साथ चाँद पर पहुँचे एडविन 'बज' एल्ड्रिन को इसमें संदेह है। उनके संदेह को गंभीरता के साथ इसलिए भी लेने की जरूरत है, क्योंकि खुद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 2001 में उन्हें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी की दशा और दिशा तय करने के लिए गठित आयोग में शामिल किया था।
अपनी आत्मकथा 'मैग्नीफिसेंट डिसोलेशन' के प्रचार और अंतरिक्ष अभियानों के लिए जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पिछले हफ्ते लंदन आए बज एल्ड्रिन ने बताया कि क्यों वे अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम से संतुष्ट नहीं हैं- कोलंबिया शटल की दुर्घटना के बाद नासा किस तरह आगे बढ़े, मैं उस योजना पर काम कर रहा था। उद्देश्य किसी तरह अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाते रहने का था।
योजना अंतरिक्ष स्टेशन को पूरा करने, बुढ़ाते अंतरिक्ष शटल को रिटायर करने और अंतरिक्ष अन्वेषण के नए लक्ष्य तय करने की थी। ये एक बढ़िया योजना थी, लेकिन इस योजना को जिस तरह लागू किया, उससे मैं खुश नहीं हूँ।
उन्होंने कहा हम अमेरिकियों को अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजते रहने के लिए शटल के रिटायरमेंट के बाद कोई यान की व्यवस्था नहीं कर सके हैं। हमें अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुँचने के लिए रूसियों की कृपा पर निर्भर रहना पड़ेगा, वह भी एक सीट के लिए सवा पाँच करोड़ डॉलर का भुगतान करने के बाद।
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उल्लेखनीय है कि नासा 2010 में शटल यानों को सेवा से हटा रहा है, लेकिन खुद अमेरिका सरकार के अनुसार शटल की जगह लेने वाली रॉकेट-केंद्रित नई व्यवस्था 2014-15 से पहले तैयार भी नहीं हो सकती।
वैसे ये समय सीमा भी अमेरिका सरकार का आशावाद ही है, क्योंकि बज एल्ड्रिन जैसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्री की मानें तो शटल के बाद अंतरिक्ष में मानव भेजने की कोई अमेरिकी प्रणाली 2018 से पहले बन पाएगी, इसकी संभावना कम ही दिखती है।
ऐसे में 2020 तक अमेरिकियों को दोबारा चाँद पर पहुँचाने के जॉर्ज बुश के सपने का क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
चाँद नहीं मंगल : वैसे आज से 40 साल पहले चाँद पर चहलकदमी करने वाले बज एल्ड्रिन फिर से चाँद पर फोकस करने को ही गलत मानते हैं।
उनका कहना है कि अमेरिका को मंगल ग्रह की ओर कदम बढ़ाना चाहिए-मैं समझता हूँ हमें लंबी यात्राएँ करने वाले अंतरिक्ष यानों की जरूरत है, जिस पर कि अंतरिक्ष यात्री भी सवार हो सकें। हम दो ओरायन यान को भेज सकते हैं, जो चाँद के पास से होकर गुजरते हुए और आगे तक जाए।
...लेकिन सवाल उठता है कि चाँद नहीं तो मंगल ग्रह ही क्यों? सौर मंडल में कोई और गंतव्य क्यों नहीं? बज एल्ड्रिन इसका जवाब देते हैं- "धरती के अलावा सिर्फ मंगल ग्रह पर ही रह पाना संभव है।
मंगल पर हम कई रोवर यान पहले ही भेज चुके हैं। हमने वहाँ कुछ इस तरह की परिस्थिति पाई है, मैं समझता हूँ जिसे चाँद के मुकाबले कहीं आसानी से मानव जीवन के उपयुक्त बनाया जा सकता है। चाँद के मुकाबले मात्र ये कुछ ज्यादा दूर है।
एमआईटी से खगोलशास्त्र में डॉक्टरेट ले चुके बज एल्ड्रिन का मानना है कि मंगल ग्रह पर सीधे जाने की कोशिश करने की बजाय पहले मंगल के चाँद फोबस पर बेस कैम्प बनाने की तैयारी करना चाहिए।
केनेडी का सपना चाँद पर मानव को भेज कर सुरक्षित वापस धरती पर लाने का था, लेकिन बज एल्ड्रिन चाहते हैं कि अमेरिका और पूरी दुनिया को अब मंगल पर जाकर सुरक्षित वापस आने भर का नहीं, बल्कि वहाँ बस्ती बसाने का सपना देखना चाहिए।