Publish Date: Sat, 31 Dec 2011 (17:00 IST)Updated Date: Sat, 31 Dec 2011 (16:59 IST)
BBC
अनवरी कहती हैं कि जिस दिन वे जिम नहीं जातीं, उस दिन उन्हें दिनभर खालीपन और शरीर में भारीपन महसूस होता है, लेकिन जब वे जिम जाती हैं, तो उन्हें अपना शरीर गठीला लगता है। पहले तो उन्हें बहुत सुस्ती लगती थी, लेकिन अब बहुत चुस्त-दुरुस्त लगती हैं।
वे बताती है, 'पहले घर से निकलना ही नहीं हो पाता था। केवल सब्जी लेने जाते थे फिर घर लौट आते थे। लेकिन जिम में आने के बाद अब दूसरी महिलाओं से भी बात हो जाती है। अब मैं कुछ औरतों की सुनती हूं, कुछ अपनी कहती हूं। अब मुझमें एक हिम्मत सी आ गई है।'
जिम से लौटने के बाद वे साफ-सफाई और घर के अन्य काम निपटाती है और कहती हैं कि जिम जाने के बाद उन्हें थकान भी नहीं लगती। राजधानी दिल्ली की निजामुद्दीन बस्ती की संकरी गलियों में से एक रास्ता आवाम फिटनेस सेंटर की तरफ जाता है, जहां सुबह साढ़े नौ बजे से साढ़े बारह बजे तक महिलाएं करसत करने के लिए जाती हैं।
अनुमति नहीं मिलती : इस जिम की मांग महिलाओं की तरफ से ही आई थी। पहले इस जिम का इस्तेमाल यहां के इक्का-दुक्का युवा ही करते थे, लेकिन अब इसे निश्चित समय के लिए महिलाएं उपयोग करती हैं। इस जिम का नाम भी युवाओं ने ही रखा है और पिछले छह महीने से महिलाएं यहां आ रही हैं।
सबा एक बेटी की मां हैं और पिछले तीन महीने से जिम आ रही हैं। कहती हैं कि वजन बहुत बढ़ गया था इसलिए उन्होंने जिम आने का सोचा। पहले वे स्वस्थ्य रहने के लिए पार्क जाती थी, लेकिन जब उन्होंने कुछ महिलाओं से आवाम फिटनेस सेंटर के बारे में जाना, तो यहां आना शुरू कर दिया।
सबा कहती हैं कि मुझे इससे पहले पता ही नहीं था कि जिम भी कुछ होता है। मेरे पति ने कहा कि तुम पार्क में जाती हो, इससे अच्छा जिम जाओ जहां तुम सुरक्षित भी रहोगी।
लेकिन वे कहती है कि एक बात स्पष्ट है, 'अगर जिम में मर्द भी आ रहे होते तो मेरा यहां आना संभव नहीं हो पाता। मेरे पति मुझे आने की अनुमति नहीं देते।'
आजादी : शहनाज कहती है कि यहां सभी लोगों का घर बहुत छोटा है, जिसमें बच्चे भी होते हैं और मेहमान आ जाते हैं, तो कोई जगह ही नहीं बचती।
शहनाज़ बताती हैं, 'यहां आकर बहुत अच्छा लगता है, महिलाओं से दोस्ती भी हो गई है, यहां खाली जगह भी है और ये केवल औरतों का जिम है, तो आजादी महसूस होती है। साथ ही आप यहां कैसे भी कपड़े पहनकर आ सकते हैं।'
लेकिन इस जिम में आने के लिए महिलाओं को प्रेरित करना इतना आसान नहीं था।
इस जिम की प्रंबधक सालेहा फरहीन का कहना है कि महिलाओं को मनाने में थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी। क्योंकि यहां लोग घर से ज़्यादा बाहर नहीं निकलते हैं। जब उन्हें ये बताया गया कि इस जिम की इंस्ट्रक्टर और प्रबंधक भी महिला हैं, तो पहले उन्होंने आकर देखा कि क्या ये वाकई सच है।
सालेहा फरहीन कहती है, 'पूरी जांच-परख करने के बाद महिलाओं ने पाया कि हम जो कह रहे थे उसमे सच्चाई है। साथ ही यहां पर कोई कुछ देख नहीं सकता। तब जाकर महिलाओं ने जिम में आना शुरू किया। हमने इन महिलाओं की पहले मेडिकल जांच भी कराई ताकि ये जाना सकें कि उन्हें कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं है। अब 40 से ज्यादा महिलाएं अलग-अलग समय पर जिम में आती हैं और यहां उन्हें किसी भी प्रकार के कपड़े पहनने की कोई पांबदी नहीं है।'
मुमताज इस जिम में बुर्के में ही कसरत करती हैं। कहती हैं कि वे फिटनेस को लेकर पहले जागरूक नहीं थी और जिम जाने के बाद उसे पता चला कि औरतों को अपने लिए भी समय निकलाना चाहिए।
मुफ्त : वे कहती है, 'मेरे पति चाहते हैं कि मैं अगर घर से बाहर निकलती हूं कि तो कुछ ऐसा-वैसा ना करुं, जैसे ब़ुर्का ना निकालूं और मुझे भी केवल फिटनेस से मतलब है। इस जिम की सबसे बढ़िया बात ये है कि ये केवल महिलाओं के लिए है और मुफ्त है।'
इस जिम को इस बस्ती में स्थापित करने में आग़ा खान ट्रस्ट ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। ये ट्रस्ट इस बस्ती में पिछले चार साल से काम कर रहा है।
ये ट्रस्ट इस बस्ती में स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा में सुधार और शहरों के नवीनीकरण से जुड़े कार्यक्रमों के लिए भी काम कर रहा है। ये ट्रस्ट नगर निगम की मदद से अपनी परियोजना को अमली जामा पहना रहा है।
इसी ट्रस्ट की एक सदस्य श्वेता माथुर हैं, जो बस्ती में काम की देख-रेख कर रही हैं। वे कहती है कि पहले इस जिम की हालत बहुत ख़राब थी। इमारत टूटी-फूटी हुई थी और मशीनों की हालत भी खराब थी।
उन्होंने बताया, 'ट्रस्ट ने यहां नई मशीने लगाई है, जिम की इमारत को ठीक किया। एक महिला ट्रेनर का इंतजाम किया ताकि महिलाओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आए।'
पहले अपनी चारदीवारी में ही सिमटी रहने वाली इन महिलाओं को जहां एक ओर स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिल रहा है, वहीं अपना दुख-दर्द खुलकर बांटने का मौका भी मिल रहा है। इससे न केवल उनका जीवन के प्रति नजरिया बदला है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है।