यूरोप और अमेरिका के विरोध के बावजूद क्राईमिया को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता देने वाले रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने अपने करियर की शुरुआत सोवियत संघ की ख़ुफ़िया एजेंसी केजीबी से की थी।
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रूसी टेलीविज़न पर उनकी 'माचोमैन' छवि वाली तस्वीरें दिखाई जाती हैं। 2007 की इस तस्वीर में वो एक हंटिंग गन लिए रिपब्लिक ऑफ़ तूवा में शिकार खेल रहे हैं।
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साल 2000 में पुतिन पहली बार रूस के राष्ट्रपति बने थे। इसके बाद वो चार साल प्रधानमंत्री रहे। दूसरी बार राष्ट्रपति के बतौर उनका चुनाव विवादों से घिरा रहा। इस तस्वीर में वह येनिसे नदी में मछली पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर 2007 की है।
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पुतिन ख़ुद को ऐसे मज़बूत नेता के बतौर पेश करते हैं जिसने 90 के दशक के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक संकट से रूस को बाहर निकाला। यह तस्वीर 2009 की है जब पुतिन देश के प्रधानमंत्री थे और साइबेरियाई तिवा इलाक़े में घुड़सवारी कर रहे थे।
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विश्लेषकों के मुताबिक पुतिन ने यूक्रेन के मामले में सख़्ती इसलिए बरती, क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर वहां रूस समर्थित सरकार के ख़िलाफ़ बगावत हुई तो रूस के भीतर पुतिन के विरोधियों के हौसले बुलंद हो जाएंगे।
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रूस में जो लोग पुतिन का विरोध करते हैं, उनके बारे में पुतिन और उनके सहयोगी कहते हैं कि ये लोग दरअसल पश्चिमी देशों के असर में हैं, जिनकी संख्या बहुत कम है।
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क्राईमिया 1783 से रूस का हिस्सा था, मगर 1954 में सोवियत संघ के नेता ख्रुश्चेव ने उसे यूक्रेन के हवाले कर दिया था। पुतिन क्राईमिया को वापस रूस में मिलाना चाहते थे और पीछे हटने को तैयार नहीं थे. यह तस्वीर 2000 की है जब जापानी लड़की नासुमी गोमी ने पुतिन को एक जूडो मुक़ाबले में धूल चटा दी थी। पुतिन ख़ुद ब्लैक बैल्ट होल्डर हैं।
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यूक्रेन संकट पर अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ दुनिया भर में गोलबंदी का प्रयास किया है. यहां तक अमरीका और यूरोपीय यूनियन ने उनके ख़िलाफ़ प्रतिबंध भी लगाए हैं, पर पुतिन इन सबसे बेफ़िक्र नज़र आते हैं।
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रूस के राष्ट्रपति के बतौर व्लादीमिर पुतिन ख़ुद को ख़तरनाक काम अंजाम देने वाले नेता के बतौर पेश करते रहे हैं। 2013 की इस तस्वीर में वह सी-एक्सप्लोरर पनडुब्बी के ज़रिए बाल्टिक सागर में गोता लगाते दिखाई दे रहे हैं। पुतिन इस अभियान में शामिल हुए जो 19वीं सदी में नेवी के जहाज़ ओलेग के अवशेषों का पता लगाने के लिए चलाया गया था।
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पुतिन ने सोची में हुए शीतकालीन पैरालिंपिक खेलों की मेजबानी में सुरक्षा के ज़बर्दस्त बंदोबस्त किए थे और इसे अपनी नाक का सवाल बना लिया था। रूस को इन खेलों में 80 पदक मिले हैं।