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गडकरी के मुँह से बोला संघ

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कुशाभाऊ ठाकरे नगर (इंदौर)। , गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010 (21:06 IST)
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भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन कार्यकर्ता व नेताओं को नैतिक आचरण का पाठ सिखाया। इसके साथ 'नए' कार्यकर्ता व नेता के निर्माण के लिए संघ की तरह भाजपा प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ग लेने की बात भी कही।

गडकरी अब नई भाजपा का निर्माण करना चाहते है, वह भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राह पर। गडकरी का चुनाव संघ के संकेतों पर ही हुआ है, इसलिए यह स्वाभाविक भी है।

अधिवेशन में गडकरी का भाषण काफी लंबा जरूर था, लेकिन उसमें कई बातें उनके मुँह से संघ बोल रहा था। नैतिक आचरण के संदर्भ में संघ के स्वयं सेवकों का उदाहरण अकसर दिया जाता है, इसलिए गडकरी भी उसी तालिम के विद्यार्थी रह चुके हैं। वही तालीम वह अब अपने कार्यकर्ता व नेताओं को भी देना चाहते हैं।

चाटूगिरी करने वाले कार्यकर्ता व नेताओं को उन्होंने कड़वे बोल सुनाए। पार्टी में लगन से काम करो लेकिन किसी भी पद पाने की आकांक्षा के लिए काम मत करो यह बताते हुए उन्होंने खुद का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि मैं कभी भी काम के अलावा किसी नेता को दिल्ली में जाकर नहीं मिला। कभी भी किसी के गले में बड़ा हार नहीं डाला। किसी को पोस्टर या कटआऊट नहीं लगवाए। फिर भी अध्यक्ष बन गया। इसका मतलब किसी भी प्रकार की चाटूगिरी न करते हुए भी पक्ष की सर्वोच्च पद पर कोई भी जा सकता है।

नेता उमर से छोटा होने के बावजूद उसके पाँव पड़ने की कृती 'लाचारी' है, ऐसे कहकर उन्होंने हम स्वाभीमान की बात करने वाले हैं, इसका अहसास करा दिया। हार और गुच्छ देने पर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की।

गडकरी के विचार पर संघ का प्रभाव उनके आज के भाषण से साफ रूप से दिखाई दे रहा था। संघ कार्यकर्ताओं के लिए प्रथम द्वितीय, तृतीय स्तर के प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करता है, उसी की तर्ज पर भाजपा भी इस तरह के वर्ग आयोजित करेगा इसके संकेत उन्होंने दिए। इसके लिए अभ्यासक्रम तैयार किया जाएगा।

गडकरी के दलित एजेंडे के पीछे भी संघ है, यह आज के भाषण से जाहिर हुआ। भाजपा के वोटर बेस में दस प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की आवश्यकता है। इसी के मद्देनजर गडकरी कल महू में आंबेडकर की प्रतिमा मे माल्यार्पण करने गए। एक दलित के घर खाना भी खाया।

आज उन्होंने पुणे में सुने पूर्व सर संघ चालक बालासाहेब देवरस के भाषण को याद किया, जिसमें उन्होंने पिछड़े व दलितों को समाज के मुख्य प्रवाह में लाने की बात कही थी।

राम मंदिर मुद्दे को छेड़कर उन्होंने अपनी मुँह से संघ की बात कही। राम मंदिर हमारी आत्मा है, यह वाक्य भी उन्होंने उसी 'संघनिष्ठा' से कहा। इस प्रश्न के हल के लिए उन्होंने मुस्लिम समाज को आव्हान किया।

गडकरी के पूरे भाषण में संघ का एजेंडा ही झलक रहा था। संघ ने भाजपा पर अपना शिकंजा कैसे कसा है, इसका गडकरी का आज का भाषण नमूना था। (अभिनय कुलकर्णी)

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