Publish Date: Sat, 20 Feb 2010 (00:40 IST)Updated Date: Sat, 20 Feb 2010 (00:39 IST)
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भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राजनीति से संन्यास लेने के संकेत देते हुए कहा कि अब मैं थक गया हूँ, मुझे विश्राम की आवश्यकता है। पार्टी अब नितिन गडकरी और संघ के मार्गदर्शन में ही चलेगी।
आडवाणी अधिवेशन में रहते हुए भी मौन थे। उनका मौन भी बहुत कुछ बोल रहा था। आज राष्ट्रीय परिषद का समापन करते हुए उन्होंने अपने मौन के पीछे छिपे संन्यास के विचार को अप्रत्यक्ष रूप से सबके सामने रखा।
आडवाणी ने कहा कि इस व्यासपीठ पर मैं सबसे बुजुर्ग हूँ। अब विश्राम की जरूरत है। भाजपा की बागडोर 'नेक्स्ट जनरेशन' के हाथों में सौंपने का जिक्र कर आडवाणी ने भाजपा के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एहसास कराया।
भाजपा का नवनिर्माण : भाजपा का 'नवनिर्माण' अध्यक्ष नितिन गडकरी के हाथों में नहीं रहा। इसका दायित्व अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पूर्ण रूप से अपने हाथ में ले लिया है। गडकरी के भाषणों से यह एहसास हो रहा था, लेकिन आडवाणी के भाषण से भी यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई। गडकरी ने आज भी संघ की भाषा बोली।
गडकरी और गोलवलकर : आडवाणी ने संघ की वैचारिक नींव रखने वाले पूर्व सरसंघचालक व गडकरी के बीच समानता बताई। अध्यक्ष पद पर गडकरी की ताजपोशी नौ फरवरी को हुई। इसी दिन गुरु गोलवलकर का तिथि से जन्मदिन था। गडकरी भी संघ से नियुक्त अध्यक्ष हैं और पार्टी के संघ की तर्ज पर चलाना चाहते है। (अभिनय कुलकर्णी)