Publish Date: Wed, 17 Feb 2010 (20:44 IST)Updated Date: Wed, 17 Feb 2010 (20:42 IST)
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वर्ष 2004 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद से पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच मचे घमासान का कड़ाई से संज्ञान लेते हुए संघ से आशीर्वाद प्राप्त नेता नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भाजपा में प्रश्न छोटे कार्यकर्ताओं ने नहीं बल्कि ‘उन बड़े नेताओं’ ने खड़े किए, जिन्हें पार्टी ने ‘बहुत कुछ दिया’ है।
गडकरी ने भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी की पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए यहाँ कहा कि पार्टी के नेताओं को यह आत्मनिरीक्षण करना होगा कि वे राजनीति अपने भविष्य के लिए कर रहे हैं या पार्टी के भविष्य के लिए। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथसिंह के कार्यकाल पर एक तरह से प्रश्नचिह्न लगाते हुए गडकरी ने कहा कि भाजपा में प्रश्न छोटे कार्यकर्ताओं की वजह से नहीं बल्कि उन बड़े नेताओं की ओर से खड़े होते हैं, जिन्हें पार्टी ने बहुत कुछ दिया है।
अपनी रेखा बड़ी करें : उन्होंने बहुत ही कड़े शब्दों में पार्टी के नेताओं से कहा कि अपनी रेखा बड़ी करें, दूसरे की रेखा छोटी करने की कोशिश न करें। गडकरी ने कहा कि सभी नेता इस बात का ध्यान रखें कि आदर आपको अपने आचरण से मिलना चाहिए और आदर की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि छोटे दिल से बड़े लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की ये पंक्तियाँ दोहराईं ‘छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता'।
जवाबदेही तय हो : पार्टी में चुनाव के टिकटों के बँटवारे में भाई-भतीजावाद की बीमारी का संकेत देते हुए गडकरी ने कहा कि पार्टी में कई बार तेरा-मेरा के आधार पर टिकट दिए जाते हैं। ऐसे में वे लोग टिकट से वंचित रह जाते हैं, जो चुनाव जीतने का दम रखते हैं। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में जवाबदेही तय होनी चाहिए। पार्टी की स्थिति पर यह कड़ी टिप्पणी करने के साथ ही उन्होंने कहा कि निराश होने की जरूरत नहीं है बल्कि स्थिति से उबरने की आवश्यकता है।
सकारात्मक दृष्टिकोण : गडकरी ने कहा कि मानव हारने से नहीं बल्कि मैदान छोड़ने से पराजित होता है। इसलिए एक नए संकल्प से पार्टी को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इन हालात से हमें जरा भी कमजोर होने की जरूरत नहीं है। नौ राज्यों में अभी भी हमारी सरकारें हैं और हजार से अधिक हमारे विधायक हैं। पौने दो सौ सांसद हैं। अत: सकारात्मक दृष्टिकोण और बड़ा दिल तथा मानवीय संबंध अच्छे रखकर हमें आगे की ओर बढ़ना चाहिए।
संप्रग पर निशाना : उधर संप्रग सरकार को निशाने पर लेते हुए गडकरी ने सीधे आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव में केन्द्र सरकार जम्मू कश्मीर में भारत के नियंत्रण को कमजोर करने और छोड़ने की ओर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक के लिए देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अमेरिका के दबाव में जम्मू कश्मीर का समाधान निकालने की कोशिश हो रही है। इसके तहत तदर्थ फैसले किए जा रहे हैं। पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी प्रशिक्षण पाने वालों को वापस लाने की कोशिश हो रही है।
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गडकरी ने कांग्रेस के कुछ नेताओं पर आरोप लगाया कि वे बटला हाउस मुठभेड़ में शामिल कथित आतंकियों के आजमगढ़ जिले में स्थित गाँवों में जाकर उनके गाँवों को पर्यटन स्थल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजयसिंह हाल ही में बटला हाउस मुठभेड़ में शामिल कथित आतंकियों के आजमगढ़ स्थित गाँवों में गए थे और अब राहुल गाँधी के भी आजमगढ़ जाने की खबरें हैं।
अमेरिकी दबाव : पाकिस्तान के साथ वार्ता शुरू करने के हाल के सरकार के फैसले में भी अमेरिकी दबाव का संकेत करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भारत उन पाकिस्तानी नेताओं से बात करने को तैयार है, जिनकी आवाज वहाँ की खुद की जनता नहीं सुनती है।
पाक-चीन गठजोड़ : चीन के संबंध में गडकरी ने कहा कि 1962 में भारत पर किए गए हमले के घाव अभी भरे भी नहीं हैं कि चीन ने पिछले कुछ दिनों में भारत के कुछ और क्षेत्रों पर गुपचुप नियंत्रण कर लिया है और यह सरकार खामोश बैठी है। उन्होंने कहा कि आज चीन और पाकिस्तान के बीच गहरा कूटनीतिक और सैन्य गठबंधन बन रहा है जो देश के लिए बहुत ही चिंता और कठिनाई का विषय बन सकता है।
उन्होंने कहा कि नेपाल भी इस त्रिकोण में नकली मुद्रा और हथियारों की भारत में तस्करी का केंद्र-सा बन गया है और इस बारे में गंभीरता से सोचे जाने की जरूरत है।
नक्सलवाद : भाजपा अध्यक्ष ने नक्सलवाद को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि नेपाल से कन्याकुमारी तक एक लाल गलियारा बन गया है। उन्होंने इस बात की आलोचना की कि मानवाधिकार की बात करने वाले इस समय नक्सली हिंसा की भर्त्सना क्यों नहीं करते जिसमें बेकसूर लोग मारे जाते हैं। (वेबदुनिया/एजेंसी)