Publish Date: Fri, 19 Feb 2010 (19:55 IST)Updated Date: Fri, 19 Feb 2010 (19:55 IST)
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लगातार दो बार लोकसभा चुनाव में मिली हार से निराश नहीं होने का पार्टी कार्यकर्ताओं को ढाँढस बँधाते हुए पिछले चुनाव में पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि हार से निराश हो जाना अच्छे कार्यकर्ता की निशानी नहीं है।
आडवाणी ने यहाँ भाजपा के तीन दिवसीय अधिवेशन के अपने समापन भाषण में कहा कि एक हार से निराशा और हताशा नहीं होनी चाहिए। हार के कारण बातचीत में और हावभाव में विश्वास की झलक न दिखे, यह अच्छे कार्यकर्ता की निशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह रथ से अब भले ही उतर गए हों लेकिन देशभक्ति, राष्ट्रवाद की उनकी यात्रा आज भी जारी है और आगे भी जारी रहेगी।
अध्यक्ष पद पर गडकरी के निर्वाचन पर बधायी देते हुए उन्होंने कहा कि वे दोनों एक ही संघ परिवार का हिस्सा हैं और इस पर उन्हें गर्व है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर भी गर्व है कि एक ही परिवार का हिस्सा होने के बावजूद हमारे संगठन में कांग्रेस की तरह परिवारवाद के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।
आडवाणी ने कहा कि कांग्रेस की परिवारवाद की जो संस्कृति है, उसकी उन्हें चिंता नहीं है लेकिन चिंता इस बात की है कि इसका अन्य जगहों पर असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में भाजपा क्यों नहीं जीत पायी, इस समय वह इसका विश्लेषण नहीं करने जा रहे हैं लेकिन कांग्रेस को जो जीत मिली है, उसकी न तो वह अधिकारी है और न ही उसके योग्य है।
आडवाणी ने कहा कि पिछले चुनाव के बाद कांग्रेस के नौ महीने के शासन काल में ही महँगाई की जो हालत हो गई है अगर ऐसे में आज चुनाव हो जाएँ तो कांग्रेस की छुट्टी हो जाएगी, वह जीत नहीं सकती। (भाषा)